Determining The Creamy Layer: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण से जुड़े क्रीमी लेयर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यह तय करने के लिए कि कोई व्यक्ति क्रीमी लेयर में आता है या नहीं, केवल परिवार की आय को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। न्यायालय के अनुसार किसी व्यक्ति के पद, सामाजिक स्थिति और पेशेवर दर्जे को भी ध्यान में रखना जरूरी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि इन पहलुओं को नजरअंदाज कर केवल आय के आधार पर फैसला करना कानून की दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि क्रीमी लेयर की पहचान करते समय पदों की श्रेणियों और सामाजिक स्थिति को भी देखा जाना चाहिए। न्यायालय के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति का पद प्रभावशाली है या उसकी सामाजिक स्थिति मजबूत है, तो केवल आय कम होने के आधार पर उसे आरक्षण का लाभ देना उचित नहीं होगा। अदालत ने संकेत दिया कि सामाजिक न्याय की भावना को बनाए रखने के लिए व्यापक मानकों को अपनाना जरूरी है।
आरक्षण में संतुलन का प्रयास
क्रीमी लेयर शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो Other Backward Classes समुदाय से होने के बावजूद आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुंचे। यह सिद्धांत 1992 के ऐतिहासिक Indra Sawhney vs Union of India फैसले के बाद लागू हुआ था।
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नियमों का ढांचा
सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार यदि किसी ओबीसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक होती है तो उसे क्रीमी लेयर माना जाता है। ऐसे उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। यह आय सीमा वर्ष 2017 में 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी। इसके अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और बड़े व्यवसायियों के बच्चों को भी क्रीमी लेयर में शामिल किया जाता है।
फैसले का असर
अदालत की ताजा टिप्पणी के बाद सरकार पर 1993 में बनाए गए क्रीमी लेयर संबंधी नियमों की समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है। न्यायालय ने संकेत दिया कि केवल आर्थिक स्थिति को ही मापदंड बनाना सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरी तरह पूरा नहीं करता। इसलिए भविष्य में ऐसे मानदंड विकसित किए जा सकते हैं जिनमें आय के साथ सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति को भी संतुलित तरीके से शामिल किया जाए।