NSE Listing : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। BSE के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुंदररमन राममूर्ति ने कहा है कि मौजूदा नियमों के तहत NSE के शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होकर ट्रेड नहीं कर सकते। यह बयान ऐसे समय आया है, जब NSE के शेयर की संभावित लिस्टिंग और उसके बाद सेल्फ-ट्रेडिंग को लेकर बाजार में कई तरह की अटकलें चल रही थीं।
NSE ने अतिरिक्त दस्तावेज से किया इनकार
रिपोर्ट के मुताबिक BSE की कंप्लायंस टीम ने NSE से यह जानने की कोशिश की कि क्या वह अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति हासिल करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने वाला है। NSE की ओर से कथित तौर पर साफ किया गया कि वह अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP में इस संबंध में कोई नया दस्तावेज दाखिल नहीं करेगा। इसके बाद सेल्फ-ट्रेडिंग की अनुमति मिलने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
BSE का पुराना अनुभव भी सामने आया
सुंदररमन राममूर्ति ने यह भी बताया कि BSE खुद इस स्थिति से गुजर चुका है। साल 2017 में BSE ने अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली थी। ऐसे में NSE को लेकर भी मौजूदा नियमों के तहत स्थिति अलग नजर नहीं आती। यही वजह है कि BSE के CEO का बयान बाजार में चल रही उन अटकलों को कमजोर करता है, जिनमें NSE की संभावित लिस्टिंग के बाद उसके अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की बात कही जा रही थी।
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क्लोजिंग ऑक्शन सेशन पर भी सवाल
BSE के हालिया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर भी राममूर्ति ने लिक्विडिटी को अहम बताया। उनके मुताबिक इस सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी नहीं होने की वजह से भागीदारी सीमित रही है। इसके साथ ही इंडेक्स वॉल्यूम में भी गिरावट देखने को मिली है। CAS के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए बाजार में भागीदारी और पर्याप्त कारोबार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
NSE और BSE के टर्नओवर में गिरावट
इस बीच दोनों प्रमुख एक्सचेंजों के इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार में भी कमजोरी दिखी। अगस्त में NSE का मंथली इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर 34.48 लाख करोड़ रुपये रहा, जो नवंबर 2023 के बाद सबसे कम बताया गया है। वहीं BSE का अगस्त टर्नओवर 32.2 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 के बाद उसका सबसे निचला स्तर है। ऐसे में NSE की लिस्टिंग के साथ-साथ एक्सचेंज कारोबार की घटती गतिविधि भी बाजार की नजर में बनी हुई है।