AI Data Centre: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से दुनिया भर के डेटा सेंटर्स में बिजली की खपत और मशीनों का गर्म होना एक बड़ी समस्या बन गया था। लेकिन टेक की दिग्गज कंपनी Nvidia ने AI डेटा सेंटर्स को कूल रखने का एक नया तरीका पेश किया है। कंपनी का दावा है कि उनकी इस नई तकनीक के बाद अब AI मशीनों को ठंडा रखने के लिए पानी की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
'रुबिन-जेनरेशन'
Nvidia ने इस एडवांस सिस्टम को रुबिन-जेनरेशन (Rubin-Generation) नाम दिया है। अभी तक कंप्यूटरों और डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए जिन भारी-भरकम पंखों और कूलिंग टावर्स का इस्तेमाल होता था, उन्हें अब पूरी तरह से हटा दिया गया है।
स्पेशल लिक्विड डिजाइन
इस नए सिस्टम में पानी की जगह एक खास तरह के कूलिंग लिक्विड का इस्तेमाल किया गया है। इस नई तकनीक के आने से मशीनों को ठंडा करने के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका मकसद लोकल वॉटर रिसोर्स पर दबाव डाले बिना हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूटिंग को ज्यादा कुशल बनाना है।
कैसे काम करती है तकनीक?
इस सिस्टम में सील्ड कोल्ड प्लेट्स से बहने वाले लिक्विड का इस्तेमाल करके सीधे चिप की गर्मी को हटाया जाता है। यह लिक्विड सीधे प्रोसेसर (चिप) की गर्मी को सोख लेता है। यह एक बंद पाइपलाइन में लगातार घूमता रहता है। यानी एक बार जो लिक्विड डाल दिया गया, वही बार-बार इस्तेमाल होता रहेगा, अलग से नया पानी डालने की कोई जरूरत नहीं होगी।
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45 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी कर सकता है काम
Nvidia का कहना है कि इस सेटअप से डेटा सेंटर्स में लगे बड़े कूलिंग टावर्स और ज्यादा पंखों वाले सिस्टम को हटाया जा सकता है, जो आमतौर पर एनर्जी और पानी दोनों की खपत बढ़ाते हैं। आमतौर पर कंप्यूटरों को बहुत ठंडे माहौल में रखना पड़ता है, लेकिन Nvidia का यह नया लिक्विड 45 डिग्री सेल्सियस (113°F) के भारी तापमान में भी सुरक्षित और शानदार तरीके से काम कर सकता है।
पानी की बचत और बिजली बिल में कटौती
कंपनी का दावा है कि सही हालात में इससे पानी का इस्तेमाल लगभग जीरो हो सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां ड्राई कूलर साल के ज्यादातर समय गर्मी निकालने का काम संभाल सकते हैं। साथ ही किसी भी डेटा सेंटर में लगभग 40% बिजली सिर्फ मशीनों को ठंडा रखने में खर्च हो जाती है। इस नई तकनीक से बिजली की यह भारी खपत बेहद कम हो जाएगी। कंपनी का कहना है कि लिक्विड कूलिंग अपनाकर और ज्यादा ऑपरेटिंग तापमान की अनुमति देकर, ऑपरेटर ऊर्जा की खपत और लंबे समय की ऑपरेटिंग लागत दोनों को कम कर सकते हैं।