Delhi Health Report: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में दिल्ली की सेहत को लेकर एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के लोग फिट हो रहे हैं यहां के मोटापे के मामलों में कमी दर्ज की गई है। लेकिन इसके साथ ही डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़े कई मामले में स्थिति खराब नजर आई है। आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासा हुआ है।
डायबिटीज का खतरा बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में पुरुषों में मोटापे कम हुआ है। देश की राजधानी में में पुरुषों का मोटापा दर पिछले NFHS-5 के 38.0 प्रतिशत से घटकर अब NFHS-6 में 34.8 प्रतिशत रह गया है। वहीं, देश के जिन 5 राज्यों में महिलाओं का मोटापा कम हुआ है, उनमें दिल्ली भी शामिल है। मोटापा भले ही कम हुआ हो, लेकिन दिल्ली में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़े हैं। डायबिटीज की दवा लेने वाली महिलाओं का आंकड़ा 12% से बढ़कर 19% हो गया है। वहीं, पुरुषों का आंकड़ा 14% से बढ़कर 22% तक पहुंच गया है। यह स्थिति काफी चिंता करने वाली है।
कुपोषण के मामलों में बढ़ोतरी
देश की राजधानी दिल्ली में डायबिटीज के साथ-साथ कुपोषण के मामले भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वजन कम होने का मतलब हमेशा स्वस्थ होना नहीं होता। कई बार खराब खानपान, पोषण की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी वजन में गिरावट देखने को मिल सकती है। महिलाओं में कुपोषण की दर 10 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई, जबकि पुरुषों में यह 9 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
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छोटे बच्चों के पोषण को लेकर जताई
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के पोषण को लेकर जताई गई है। जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध मिलने की दर 51.2% से घटकर 45.1% हो गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) कहता है कि बच्चे को शुरुआती 6 महीने सिर्फ मां का दूध मिलना चाहिए। इससे बच्चों को आवश्यक पोषण और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। लेकिन दिल्ली में ऐसा करने वाली मां का ग्राफ 64.3% से गिरकर 48.3% पर आ गया है।
पूरक आहार की कमी
वहीं, 6 से 8 महीने के बच्चों को दूध के साथ पूरक भोजन देने की दर 62.9 प्रतिशत से घटकर 52.5 प्रतिशत हो गई। 6 से 23 महीने के केवल 11.2 प्रतिशत बच्चों को ही न्यूनतम पर्याप्त आहार मिल रहा है, जो पहले 16 प्रतिशत था।