पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई करने वाले बड़े-बड़े टैंकर अब सामान्य तरीके से नहीं चल रहे हैं। सुरक्षा कारणों से कई जहाज अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी एआईएस को बंद करके यात्रा कर रहे हैं। इससे उनकी लोकेशन सार्वजनिक ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई नहीं देती और वे संभावित हमलों से बचने की कोशिश करते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे संवेदनशील इलाका
फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध और सुरक्षा खतरों के कारण यहां से गुजरने वाले जहाज अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। हाल के महीनों में बड़ी संख्या में टैंकरों ने अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखकर इस क्षेत्र को पार किया है।
भारत के लिए राहत की खबर
इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद भारत की ऊर्जा सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा और एलएनजी तथा एलपीजी की भारी मात्रा इसी क्षेत्र से आयात करता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कच्चा तेल, रसोई गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति लगातार भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच रही है। इससे घरेलू बाजार में तत्काल किसी बड़ी बाधा की आशंका नहीं दिख रही है।
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रडार से गायब होने का जोखिम
समुद्री नियमों के अनुसार जहाजों को अपना ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखना चाहिए ताकि अन्य जहाज उनकी स्थिति जान सकें। जब एआईएस बंद होता है तो जहाज लगभग अदृश्य हो जाते हैं। इससे व्यस्त समुद्री मार्गों में टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि मौजूदा हालात में कई कंपनियां सुरक्षा जोखिम को प्राथमिकता दे रही हैं और हमलों से बचने के लिए यह कदम उठा रही हैं।
ऊर्जा कंपनियों की नई रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले ट्रैकिंग सिस्टम बंद करने की रणनीति मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने वाले देशों के जहाज अपनाते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। खाड़ी क्षेत्र की कई बड़ी ऊर्जा कंपनियों के जहाज भी इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी भी हाल में सप्लाई चेन को जारी रखना और ऊर्जा निर्यात को प्रभावित होने से बचाना है।
वैश्विक बाजार की नजर बनी हुई है
ऊर्जा बाजार फिलहाल पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अभी तक जहाजों की आवाजाही जारी रहने से वैश्विक सप्लाई बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में घबराहट तो है, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है।