
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को मऊ के एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया. उनके खिलाफ यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन को लेकर दर्ज हुआ था. दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान ओम प्रकाश राजभर के काफिले को केवल दो गाड़ियों की अनुमति थी. लेकिन उनके साथ चार गाड़ियां चल रही थीं. इसके अलावा, एक जनसभा में उन्होंने विवादित बयान देते हुए लोगों को "जूता मारने" जैसी बात कही थी. उनका यह भाषण सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. चुनाव आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया.
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किसने दर्ज कराया था केस?
यह मामला मऊ जिले के हलधरपुर थाने में दर्ज हुआ था. तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर उड़नदस्ता निरीक्षक रुद्रभान पांडेय ने उनकी शिकायत दर्ज कराई थी. उसी शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी. बता दें कि मामले को लेकर मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने खुद इसको स्वीकार करते हुए कहा, “2019 के चुनाव प्रचार में यह मामला दर्ज हुआ था. आज मैंने एमपी-एमएलए कोर्ट में संविधान का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है.”
अदालत में पेश हुए राजभर
सोमवार को वह मऊ स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचे और सरेंडर कर दिया. इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई की. फिलहाल कोर्ट ने क्या आदेश दिया है ये अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है. बता दें कि ओम प्रकाश राजभर अपनी बेबाक बयानबाजी और सीधे अंदाज के लिए जाने जाते हैं. 2019 का यह मामला लंबे समय से चल रहा था. अब जब उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है तो माना जा रहा है कि वो कानूनी प्रक्रिया का पालन करके इसे जल्द खत्म करना चाहते हैं.
यह पूरा मामला दिखाता है कि आचार संहिता उल्लंघन को चुनाव आयोग गंभीरता से ले रहा है और बड़े नेताओं पर भी कार्रवाई हो रही है.ओम प्रकाश राजभर ने सरेंडर कर यह संदेश दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है और अदालत के सामने हर किसी को जवाब देना पड़ता है.