Food Inflation Crisis : देशभर में रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ता नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों में चीनी, प्याज, दाल और खाने के तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चर्चा चीनी की कीमतों को लेकर है, जो कई बाजारों में 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं प्याज, दाल और खाद्य तेलों ने भी आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है।
चीनी पर सरकार की सख्ती
चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार सक्रिय हो गई है। बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए व्यापारियों पर स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। सरकार ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से ही पेराई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि त्योहारों के मौसम में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे।
चीनी महंगी क्यों हुई?
सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण जमाखोरी की आशंका है। कुछ व्यापारियों और मिल संचालकों द्वारा बड़े पैमाने पर स्टॉक रखने की खबरों के बाद सरकार ने 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इथेनॉल उत्पादन को भी वजह मान रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस दावे को खारिज किया है।
प्याज की नई फसल में देरी
प्याज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। एक महीने पहले जहां औसत खुदरा कीमत करीब 35 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अब यह 40 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी बताई जा रही है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई इलाकों में मानसून की स्थिति के कारण बुवाई प्रभावित हुई है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।
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दालों पर मानसून का असर
अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दालों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। इसके पीछे कमजोर मानसून और दलहन की बुआई में कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस साल दलहन की खेती का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहा है। ऐसे में उत्पादन घटने की आशंका से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है और आने वाले समय में दालें और महंगी हो सकती हैं।
तेल के दाम भी बढ़े
खाने के तेल की कीमतों में भी उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें 20 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडोनेशिया में सूखे जैसी परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति में कमी का असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते सूरजमुखी तेल के आयात पर असर पड़ा है। यही वजह है कि सरसों तेल समेत कई खाद्य तेलों के दाम पिछले एक महीने में 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
आम आदमी की बढ़ी चिंता
त्योहारों का मौसम करीब आते ही खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार राहत के लिए कई कदम उठा रही है, लेकिन बाजार में महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है। आने वाले हफ्तों में नई फसल की आवक और सरकारी हस्तक्षेप से कीमतों में राहत मिलती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।