
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस अब एक ठोस कानून का रूप ले चुकी है. लोकसभा से पारित होने के बाद ये बिल राज्यसभा से भी पास हो गया. सदन में विपक्षी दलों का हंगामा देखने को मिला, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक पेश कर दिया. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग अब समाज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुकी है. ये ड्रग्स जैसी लत की तरह फैल रही है और लाखों लोग इसमें अपनी जमा-पूंजी गंवा चुके हैं. कई मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें लोग कर्ज में डूबे और आत्महत्या तक कर ली. ऐसे हालात में सरकार का दायित्व है कि इस लत को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए.
विधेयक के पीछे का मकसद क्या है ?
इस बिल का मकसद सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि इसके खतरनाक पहलुओं को खत्म करना है. इसमें तीन बड़े बिंदुओं पर फोकस किया गया है.
युवाओं और बच्चों में गेमिंग की लत को रोकना
पैसे के अवैध लेन-देन पर रोक लगाना
भ्रामक विज्ञापनों पर नियंत्रण करना
बिल के तहत पैसों से जुड़े सभी ऑनलाइन गेम्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा. वहीं ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग जैसे सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही गई है.
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सजाएं और जुर्माने का प्रावधान
इस कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि कंपनियों और अपराधियों को आसानी से छोड़ा न जा सके
ऑनलाइन मनी गेम्स ऑफर करना: 3 साल तक जेल या 1 करोड़ रुपए जुर्माना या दोनों
भ्रामक विज्ञापन: 2 साल तक जेल या 50 लाख रुपए जुर्माना
बिना अनुमति लेन-देन (धारा 7): 3 साल तक जेल या 1 करोड़ रुपए जुर्माना
बार-बार अपराध करने वाले: 3-5 साल जेल और 1-2 करोड़ रुपए जुर्माना
कंपनियों की जिम्मेदारी: कंपनी दोषी पाई जाने पर उसके निदेशकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी
सरकारी आदेश न मानने पर: 10 लाख रुपए तक का जुर्माना और कंपनी का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है
क्यों जरूरी है था ये ऑनलाइन गेमिंग का बिल?
भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से फैल रही है. लाखों युवा इसमें दिन-रात डूबे रहते हैं. आसान कमाई के लालच में कई लोग अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवा चुके हैं, तो कई ने लोन लेकर गेम खेला और हारने पर तनाव में आकर आत्महत्या तक कर ली. सरकार का ये कदम उन परिवारों के लिए राहत है, जो इस लत की वजह से बर्बाद हो चुके हैं.इस कानून के लागू होने से न सिर्फ युवाओं को गेमिंग की लत से बचाया जा सकेगा, बल्कि अवैध धंधों और पैसों के गोरखधंधे पर भी रोक लगेगी.