Operation Safed Sagar : भारत में अपने 10 साल पूरे होने के मौके पर नेटफ्लिक्स ने दावा किया है कि उसकी आगामी सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 24 मिलियन डॉलर (करीब ₹215 करोड़) का योगदान दिया है। कंपनी के को-सीईओ टेड सारांडोस ने कहा कि यह भारत में नेटफ्लिक्स का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोडक्शन है, जिसने मनोरंजन के साथ-साथ रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा दिया।
850 से ज्यादा कारोबारों और हजारों लोगों को मिला काम
इस प्रोजेक्ट से 850 से अधिक स्थानीय व्यवसायों को सीधा फायदा मिला। शूटिंग और निर्माण कार्य में 200 से ज्यादा कलाकार और क्रू सदस्य शामिल रहे, जबकि 4,000 से अधिक दिहाड़ी कर्मचारियों को रोजगार मिला। निर्माण, सेट डिजाइन, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, कैटरिंग, उपकरण, लाइटिंग, पोस्ट-प्रोडक्शन और अन्य सेवाओं से जुड़े कई स्थानीय कारोबारों को भी काम मिला।
11 शहरों में 115 दिन तक हुई शूटिंग
सीरीज की शूटिंग 115 दिनों तक देश के 11 शहरों नई दिल्ली, नोएडा, मुंबई, गुरुग्राम, चंडीगढ़, पटियाला, पटौदी, मनाली, केलांग, ग्वालियर और बीकानेर में की गई। बड़े स्तर पर हुई इस शूटिंग से स्थानीय अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र को भी लाभ पहुंचा।
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VFX सेक्टर को मिला बड़ा बढ़ावा
'ऑपरेशन सफेद सागर' के लिए नेटफ्लिक्स ने भारत के 15 VFX स्टूडियो के साथ काम किया। बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई के करीब 1,200 कलाकारों ने सीरीज के लिए लगभग 50 मिनट के हवाई दृश्य तैयार किए। कंपनी के मुताबिक, केवल VFX और क्रिएटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी साझेदारियों ने ही करीब ₹49 करोड़ का आर्थिक योगदान दिया, जो पूरे प्रोजेक्ट के कुल योगदान का लगभग 20% है।
'भारत में विश्वस्तरीय कंटेंट बनाने की क्षमता'
टेड सारांडोस ने कहा कि नेटफ्लिक्स का हर प्रोडक्शन स्थानीय स्तर पर रोजगार और अवसर पैदा करता है। उनके अनुसार, भारत के पास अब ऐसा टैलेंट, तकनीकी क्षमता और प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर है जो दुनिया के बेहतरीन कंटेंट के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। उन्होंने 'ऑपरेशन सफेद सागर' को भारत में नेटफ्लिक्स के 10 साल के सफर की सबसे मजबूत मिसाल बताया।
200 से ज्यादा भारतीय ओरिजिनल्स लॉन्च
नेटफ्लिक्स ने बताया कि पिछले एक दशक में उसने भारत में 200 से अधिक भारतीय ओरिजिनल फिल्में और सीरीज लॉन्च की हैं। कंपनी का कहना है कि भारतीय कहानियां अब वैश्विक दर्शकों तक पहुंच रही हैं और इससे देश की तेजी से बढ़ती क्रिएटिव इकॉनमी को भी मजबूती मिल रही है।