Operation Sindoor Pakistan Military Losses : भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिसने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की तस्वीर और साफ कर दी है। रडार से लेकर रनवे तक, कमांड सेंटर से लेकर लड़ाकू विमानों तक, भारतीय कार्रवाई का असर कई अहम ठिकानों पर देखने को मिला। एयर चीफ ने बताया कि इस अभियान का मकसद तय लक्ष्यों को सटीक तरीके से निशाना बनाना था और भारतीय सशस्त्र बलों ने मिलकर इसे अंजाम दिया।
रडार, रनवे और कमांड सेंटर बने निशाना
एपी सिंह के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के कम से कम चार रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा दो कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी प्रभावित हुए। भारतीय हमलों में दो रनवे और तीन सैन्य हैंगर भी क्षतिग्रस्त हुए। एयर चीफ ने यह भी बताया कि भारतीय आकलन के अनुसार पाकिस्तान का एक C-130 श्रेणी का विमान भी प्रभावित हुआ था। इसके साथ ही चार से पांच लड़ाकू विमानों को जमीन पर नष्ट किए जाने के संकेत मिले, जिनमें F-16 जैसे विमान शामिल होने की संभावना जताई गई।
12 से 13 सैन्य विमानों के नुकसान का दावा
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कुल मिलाकर 12 से 13 सैन्य विमानों का नुकसान हुआ या वे प्रभावित हुए। इसमें जमीन पर खड़े विमान और हवाई कार्रवाई के दौरान हुए नुकसान दोनों शामिल हैं। एयर चीफ ने बताया कि F-16 और JF-17 जैसे लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचाने के संकेत मिले थे। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि यह भारतीय पक्ष का आकलन है, जो उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया।
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एयर डिफेंस सिस्टम ने निभाई अहम भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की एयर डिफेंस क्षमता भी बड़ी ताकत बनकर सामने आई। एपी सिंह ने कहा कि S-400 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल और रडार प्रणाली ने दुश्मन के विमानों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना था कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के विमानों को उनकी हथियार चलाने की दूरी तक पहुंचने से पहले ही चुनौती दे सकते हैं। यही वजह रही कि अभियान के दौरान भारतीय पक्ष को रणनीतिक बढ़त मिली।
ड्रोन युद्ध पर क्या बोले एयर चीफ?
भविष्य की लड़ाइयों को लेकर भी एयर चीफ ने बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि केवल ड्रोन के भरोसे युद्ध नहीं जीते जा सकते। उनके मुताबिक मानवयुक्त लड़ाकू विमान और ड्रोन दोनों को साथ मिलाकर इस्तेमाल करना होगा। एपी सिंह ने ड्रोन को वायु शक्ति का विस्तार बताया, लेकिन साथ ही कहा कि लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार, आधुनिक लड़ाकू विमान और मजबूत सैन्य क्षमता की जरूरत आगे भी बनी रहेगी।
आत्मनिर्भरता पर दिया खास जोर
एयर चीफ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताया। उनका कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे संघर्षों की वजह से हथियारों और सैन्य उपकरणों की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में केवल खरीद पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन और मजबूत सप्लाई चेन पर ध्यान देना जरूरी है। इसी वजह से भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।