Four girls got married: उत्तर प्रदेश के कई जिलों की चार युवतियों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया. इन युवतियों ने समाज की परंपराओं को तोड़ते हुए बिना दूल्हे के ही शादी रचाई. यह अनूठा विवाह कार्यक्रम बरेली, मुरादाबाद, शामली और गोंडा की चार युवतियों ने मिलकर आयोजित किया. शादी की सभी रस्में निभाई गईं लेकिन दूल्हा कोई नहीं था. दरअसल, इन युवतियों ने खुद को ‘शक्ति स्वरूपा’ मानते हुए यह संदेश दिया कि वे किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर हैं.
आत्मनिर्भरता का दिया संदेश
इन युवतियों ने विवाह की पारंपरिक रस्में पूरी कर यह बताया कि एक महिला को अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है. बरेली की पूजा, मुरादाबाद की माया, शामली की जान्हवी और गोंडा की सविता ने इस विवाह समारोह को आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना दिया. उन्होंने मांग में सिंदूर भरा, सात फेरे लिए और खुद को अपनी ही जीवन संगिनी घोषित किया. इस आयोजन ने सामाजिक सोच को झकझोर कर रख दिया.
समाज को सोचने पर किया मजबूर
राजस्थान के सेलम गांव से प्रेरित इस पहल का उद्देश्य था कि महिलाएं किसी भी निर्णय में पुरुषों पर आश्रित न रहें. जहां एक तरफ समाज आज भी लड़कियों की शादी को उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है, वहीं इन युवतियों ने दिखाया कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता भी एक उत्सव हो सकता है. यह शादी महज एक रस्म नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन गया है, जो समाज को महिलाओं की स्वतंत्र सोच और उनके अधिकारों को समझने का संदेश दे रहा है.