UDISE+ Report: देश में नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत हर बच्चे को क्वॉलिटी एजुकेशन देने का लक्ष्य है। लेकिन 29 जुलाई को राज्यसभा संसद में शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़े एक बेहद चिंताजनक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश भर में 1 लाख से भी ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, जो केवल एक अकेले शिक्षक के भरोसे चल रहा है। यानि इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से लेकर दफ्तरी काम तक का पूरा जिम्मा सिर्फ एक ही मास्टर साहब पर है।
आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर
UDISE+ (2025-26) के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 1,00,843 ऐसे स्कूल हैं, जो पूरी तरह से सिंगल टीचर के भरोसे चल रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा सिंगल टीचर वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है। जहां 16,357 स्कूल सिर्फ एक मास्टर जी के सहारे चल रहे हैं। यह कुल राष्ट्रीय आंकड़े का 16% से भी अधिक है।
सबसे ज्यादा सिंगल टीचर स्कूल वाले राज्य?
आंध्र प्रदेश 16,357
झारखंड 9,827
महाराष्ट्र 9,269
कर्नाटक 8,042
उत्तर प्रदेश 7,874
राजस्थान 7,200
पश्चिम बंगाल 6,769
तेलंगाना 4,793
तमिलनाडु 3,957
असम 3,159
हिमाचल प्रदेश: 3,128
उत्तराखंड: 2,655
छत्तीसगढ़: 2,461
इन राज्यों में स्थिति बेहतर
वहीं दूसरी तरफ केरल में 67, नागालैंड में 35, सिक्किम में 31, लद्दाख में 28, दिल्ली में 7 और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में केवल 1 स्कूल ही ऐसा है, जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है।
खाली पदों पर सरकार ने क्या दी सफाई
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार शिक्षकों की कमी के पीछे कई मुख्य वजहें हैं। समय पर नई भर्तियों का न होना, शिक्षकों का रिटायर होना या इस्तीफा देना, दूरदराज, आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति की चुनौतियां। शिक्षा मंत्रालय का यह भी कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, तैनाती और सेवा संबंधी जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की होती है, केंद्र की नहीं।
देश में छात्र-शिक्षक अनुपात कितना है?
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत देश में औसतन छात्र-शिक्षक अनुपात मानकों के भीतर है -
प्राथमिक स्तर- 19:1
उच्च प्राथमिक- 17:1
माध्यमिक- 15:1
उच्च माध्यमिक – 23:1