UGC NET 2026: यूजीसी नेट (UGC NET) जून 2026 की परीक्षा के आखिरी दिन उत्तर प्रदेश के कानपुर में भारी बारिश और जलभराव छात्रों के लिए मुसीबत बन गया। लगातार हो रही तेज बारिश और सड़कों पर लगे लंबे ट्रैफिक जाम के कारण 150 से अधिक उम्मीदवार समय पर परीक्षा सेंटर तक नहीं पहुंच सके, जिससे कारण उनकी परीक्षा छूट गई। बता दें कि एनटीए यूजीसी नेट की परीक्षाएं 22 जून से शुरू हुई थीं, जो आज 30 जून को खत्म हो जाएंगी।
एनटीए पर फुटा अभ्यर्थियों का गुस्सा
परीक्षा से चूके अभ्यर्थियों का गुस्सा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के परीक्षा केंद्र अलॉट करने के सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाते हुए कहा कि पेपर छूटना आम बात हो गई है। एनटीए का एग्जाम सेंटर अलॉट करने का सिस्टम समझ से परे है। क्योंकि इनके ज्यादातर सेंटर सिटी में होने के बजाय गांव देहात में ज्यादा होते हैं, जहां वक्त पर पहुंचना बहुत बड़ा टास्क होता है। उम्मीदवारों का कहना है कि गेट बंद होने के डर से वे परीक्षा से पहले ही भारी मानसिक तनाव से गुजरते हैं।
10 बार कर चुके हैं नेट क्वालीफाई
परीक्षा छूटने वाले 150 से अधिक उम्मीदवारों में कानपुर के डॉ. अमित कुमार निरंजन भी शामिल हैं। वे 10 बार अलग-अलग विषयों में नेट एग्जाम क्वालीफाई कर चुके हैं और तीसरी बार पीएचडी कर रहे हैं। इस बार डॉ. अमित 11वीं बार नेट एग्जाम देने के लिए घर से निकले थे, लेकिन 2 घंटे बाद भी सेंटर तक नहीं पहुंच पाए।
एनटीए को भेजा शिकायत पत्र
डॉ. अमित कुमार ने कहा कि आज मेरा 11वां नेट का पेपर था। लेकिन ये लोग सेंटर सिटी में न देकर इतने अंदर गांव-देहात में देते हैं कि बारिश या थोड़ा भी ट्रैफिक जाम में फंस जाओ तो परीक्षा नहीं दे सकते। डॉ. अमित कुमार और अन्य प्रभावित छात्रों ने एकजुट होकर एनटीए को एक शिकायती पत्र भेजा है। इसमें 150 से अधिक उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड के साथ-साथ कानपुर में हुए जलभराव और ट्रैफिक जाम की तस्वीरें भी भेजी गई हैं और परीक्षा दोबारा कराने की मांग की गई है।
एनटीए ने क्या कहा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छात्रों को आश्वासन तो दिया है, लेकिन परीक्षा को री-शेड्यूल करने से साफ मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि एनटीए के पास इस परेशानी को लेकर कोई ठोस रास्ता नहीं है। बता दें, हर साल लाखों छात्र असिस्टेंट प्रोफेसर, पीएचडी दाखिले या जेआरएफ (JRF) के लिए यह परीक्षा देते हैं।