मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़े टकराव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां से सप्लाई प्रभावित होती है तो कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर असर पड़ता है। पाकिस्तान भी उन्हीं देशों में शामिल है जो इस रास्ते पर काफी हद तक निर्भर है।
सिर्फ 28 दिनों का बचा पेट्रोल-डीजल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सरकार के पास फिलहाल सीमित मात्रा में ही ईंधन बचा है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बताया कि देश के पास लगभग 28 दिनों के लिए पेट्रोल और डीजल का स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा कच्चे तेल का भंडार करीब 10 दिनों के लिए बताया गया है और एलपीजी गैस का रिजर्व भी ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है। ऐसे में सरकार के सामने जल्द समाधान निकालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
सरकार ने संकट से निपटने की बनाई योजना
पाकिस्तान सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हर हफ्ते बदलाव कर सकती है। इसके अलावा तेल कंपनियों को बढ़ी हुई लागत से राहत देने के लिए मुआवजा देने की योजना भी बनाई जा रही है। सरकार का मकसद है कि किसी तरह ईंधन की सप्लाई बनी रहे और बाजार में घबराहट का माहौल न बने।
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फ्यूल बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम की तैयारी
ईंधन की बचत के लिए पाकिस्तान में वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार कंपनियों को सप्ताह में कुछ दिन कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दे सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों से कार शेयर करने और कम वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए कहा जा सकता है। स्कूल और कॉलेजों को भी जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन पढ़ाई कराने का सुझाव दिया जा सकता है।
खाड़ी देशों पर है पाकिस्तान की निर्भरता
पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक देश अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 30 प्रतिशत तैयार पेट्रोल-डीजल खाड़ी क्षेत्र से मंगाता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो पाकिस्तान के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है।
तेल महंगा हुआ तो बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल सप्लाई में रुकावट आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और इसका असर परिवहन से लेकर खाने-पीने की चीजों तक पर पड़ सकता है।