
India-Afghanistan rapprochement: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल गुरुवार रात जोरदार धमाकों से गूंज उठी, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने कथित तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमला किया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, लड़ाकू विमानों ने राजधानी के आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर बम गिराए। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत के दौरे पर हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस कूटनीतिक समीकरण से असहज महसूस कर रहा है, क्योंकि भारत और काबुल के बीच संबंधों में फिर से गर्माहट लौटती दिख रही है।
भारत दौरे के बीच पाक की कार्रवाई
तालिबान सरकार और पाकिस्तान के बीच रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। इस बीच, मुत्ताकी की भारत यात्रा और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि काबुल में एयर स्ट्राइक का समय रणनीतिक संकेत है — पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि अफगानिस्तान में उसकी सैन्य पकड़ अब भी बनी हुई है। वहीं, TTP के सरगना नूर वली महसूद के मारे जाने की खबरों को खुद महसूद ने खारिज करते हुए कहा कि यह दुश्मन का झूठा प्रचार है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान TTP को पनाह और आर्थिक मदद दे रहा है, जिसने हाल के महीनों में कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।
तनाव और गहराया, बातचीत की मांग उठी
पूर्व अमेरिकी राजदूत ज़ल्मे खलीलज़ाद ने इस हवाई हमले को “खतरनाक वृद्धि” बताते हुए पाकिस्तान और तालिबान से बातचीत की अपील की है। यह हमला पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की चेतावनी के 24 घंटे बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब "बहुत हो चुका" है और पाकिस्तान अपने सैनिकों पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। जानकारों के अनुसार, काबुल में यह हमला सिर्फ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत और अफगानिस्तान को एक राजनयिक संदेश देने की कोशिश भी है — कि पाकिस्तान क्षेत्रीय समीकरणों में अब भी एक निर्णायक खिलाड़ी है। हालांकि, इस कदम से दक्षिण एशिया में तनाव और अस्थिरता बढ़ने की आशंका गहरा गई है।