.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3Df8161668-5dbb-47f5-a3e3-f624dad1c0fe&w=3840&q=75)
Pakistan survives thanks to Saudi: पाकिस्तान की आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और उसका गुजारा सऊदी अरब की मदद से हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद को सऊदी अरब ने बेहद सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराया है, जिस पर केवल 4 प्रतिशत सालाना ब्याज देना पड़ता है। वहीं, पाकिस्तान अन्य देशों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज पर औसतन 6.1 प्रतिशत ब्याज चुका रहा है। इस तुलना से साफ है कि पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब सबसे बड़ा सहारा बन चुका है, जिसने कई बार नकद जमा सुविधा भी दी है।
चीन से ज्यादा बड़ा मददगार बना सऊदी अरब
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान को चीन से जो कर्ज मिलता है, उसकी तुलना में सऊदी अरब का कर्ज लगभग एक-तिहाई सस्ता है। यही नहीं, यह विदेशी वाणिज्यिक कर्ज की आधी लागत पर आता है। हाल के वर्षों में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की जमा सुविधा मुहैया कराई, जिसकी अवधि खत्म होने पर उसे बिना अतिरिक्त ब्याज बढ़ा दिया जाता है। दिसंबर में दो अरब अमेरिकी डॉलर की जमा सुविधा की अवधि पूरी होनी है और पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय इसे फिर से आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सऊदी कर्ज पर निर्भर हो चुकी है।
IMF और खाड़ी देशों पर बढ़ती निर्भरता
सऊदी अरब के अलावा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का भी बड़ा कर्जदार है। आईएमएफ कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को 3 अरब अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त सऊदी कर्ज मिला है, जिसकी अवधि अगले वर्ष जून में खत्म होगी। आईएमएफ ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख सहयोगी– सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात अपने-अपने जमा कर्ज की राशि कार्यक्रम पूरा होने तक बनाए रखें। इन तीनों देशों का कुल 12 अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा है। यह स्थिति बताती है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बाहरी कर्ज और मदद के बिना टिक पाना मुश्किल है।