US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच घोषित सीजफायर को लेकर पाकिस्तान में खुद की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। पाकिस्तान की मीडिया और कुछ संगठनों ने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हुए शांति के नोबेल शांति पुरस्कार की मांग तक कर डाली है, जिसे कई लोग अतिशयोक्ति मान रहे हैं।
ट्रंप के बयान से मिला मुद्दा
सीजफायर की घोषणा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने शहबाज शरीफ और असीम मुनीर का जिक्र किया था। इसी को आधार बनाकर पाकिस्तानी मीडिया लगातार यह दावा कर रही है कि युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है और उसे इसका श्रेय मिलना चाहिए।
मीडिया और पूर्व अधिकारियों के दावे
पाकिस्तान के कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों और संस्थानों ने भी इस दावे को आगे बढ़ाया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर एक बड़े युद्ध को टाल दिया और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया। कराची के व्यापारिक संगठनों ने भी इस कथित भूमिका के लिए पाक नेतृत्व की सराहना की है।
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चीन की भूमिका पर जोर
हालांकि कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इस दावे पर सवाल उठाती हैं। बताया जा रहा है कि ईरान को सीजफायर के लिए राजी करने में चीन की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण रही। खुद ट्रंप ने भी संकेत दिया कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए मनाने में मदद की, जिससे पाकिस्तान के दावे कमजोर पड़ते हैं।
विश्वसनीयता पर उठे सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की ओर से नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करना जल्दबाजी और अतिशयोक्ति है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि असल में युद्धविराम के पीछे किन देशों की निर्णायक भूमिका रही और किसे इसका वास्तविक श्रेय मिलना चाहिए।