लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल पर बड़ी चर्चा शुरू हो चुकी है। पेपर लीक, नकल और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी जैसे मामलों से जुड़े इस बिल पर सदन में करीब 8 घंटे तक चर्चा होने की बात है। सरकार और विपक्ष दोनों तरफ से कई बड़े नेता अपनी बात रखने वाले हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार की तरफ से बिल के प्रावधानों और इसमें किए जा रहे बदलावों को लेकर पक्ष रख रहे हैं। हाल के दिनों में परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जिस तरह सियासत गर्म रही है, उसे देखते हुए इस बहस पर पूरे देश की नजर लगी हुई है।
पेपर लीक पर सख्ती की बात कर रही सरकार
सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून में बदलाव के जरिए पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर पिछले कुछ समय से छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली है। ऐसे में सरकार इस बिल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष इस चर्चा के दौरान परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की परेशानियों और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों को उठा सकता है।
बीजेपी के कई बड़े सांसद चर्चा में
सदन में चल रही इस लंबी चर्चा के लिए एनडीए ने भी अपने कई नेताओं को मैदान में उतारा है। बीजेपी की तरफ से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, अनुराग ठाकुर और शशांक मणि त्रिपाठी जैसे सांसद चर्चा में अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा भोला सिंह, संजय जायसवाल और विष्णु दत्त शर्मा के नाम भी सामने आए हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी के सांसद बिल के प्रावधानों के साथ यह बताने की कोशिश करेंगे कि परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने और पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए कानून में बदलाव क्यों जरूरी है।
एनडीए के सहयोगी भी रखेंगे अपना पक्ष
इस बहस में केवल बीजेपी ही नहीं बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों की तरफ से भी कई नेता हिस्सा ले सकते हैं। अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, एनसीपी के सुनील तटकरे और टीडीपी के लावू कृष्णा के नाम चर्चा में शामिल नेताओं में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अरुण भारती और आलोक सुमन भी सदन में अपनी बात रख सकते हैं। करीब 8 घंटे तक चलने वाली चर्चा के कारण सरकार और सहयोगी दलों को बिल के अलग-अलग पहलुओं पर विस्तार से पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
राहुल-अखिलेश समेत विपक्ष भी तैयार
दूसरी तरफ विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई जैसे नेता चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के भी बिल पर बोलने की संभावना है। विपक्ष की तरफ से पेपर लीक की पिछली घटनाओं, परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाया जा सकता है। ऐसे में चर्चा आगे बढ़ने के साथ सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिल सकती है।
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8 घंटे की बहस पर देशभर के छात्रों की नजर
पेपर लीक का मुद्दा सीधे लाखों प्रतियोगी छात्रों और उनके परिवारों से जुड़ा है, इसलिए लोकसभा में चल रही करीब 8 घंटे की इस चर्चा की अहमियत काफी बढ़ गई है। एक तरफ सरकार संशोधित कानून के जरिए पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर सख्ती की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चर्चा के दौरान कौन से नए मुद्दे सामने आते हैं, विपक्ष किन सवालों के साथ सरकार को घेरता है और आखिर में सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है।