जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन लेना सही है, लेकिन कुछ गलत फैसले आपकी EMI, बजट और क्रेडिट स्कोर पर भारी पड़ सकते हैं। इन बातों का ध्यान रखकर आप मुश्किलों से बच सकते हैं।
जरूरत और फिजूल खर्च में फर्क न करना
कई लोग बिना सोचे-समझे हर जरूरत में पर्सनल लोन ले लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लोन तभी लें, जब खर्च वास्तव में जरूरी हो—जैसे शादी, बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें या मेडिकल इमरजेंसी। घूमने, महंगे गैजेट खरीदने या शौक पूरे करने के लिए लोन लेना आगे चलकर बड़े वित्तीय दबाव का कारण बन जाता है। इसलिए पहले यह तय करें कि खर्च अनिवार्य है या सिर्फ इच्छा पूरी करने वाला। यही समझ आपको सही वित्तीय निर्णय लेने में मदद करती है।
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EMI को बजट में शामिल न करना
लोन लेते समय कई लोग अपनी मासिक आय-खर्च का वास्तविक हिसाब नहीं लगाते। EMI का बोझ आपके बजट से बड़ा हो गया तो बाकी खर्च संभालना मुश्किल हो जाता है। बेहतर तरीका यह है कि EMI वही चुनें जो आपकी इनकम में आराम से फिट हो। जरूरत पड़े तो लोन अवधि बढ़ाकर EMI कम कर सकते हैं। EMI चूकने पर न सिर्फ बैंक पेनाल्टी लगाता है, बल्कि आपका सिविल स्कोर भी गिरता है, जो भविष्य के किसी भी लोन को मुश्किल बना देता है।
एकमुश्त पैसे आने पर प्रीपेमेंट न करना
पर्सनल लोन पर ब्याज दर काफी ज्यादा होती है, इसलिए यदि कभी बोनस, सेविंग या अन्य माध्यम से एकमुश्त पैसा आए, तो प्रीपेमेंट कर देना समझदारी होती है। कई लोग चार्ज के डर से ऐसा नहीं करते, लेकिन थोड़े से प्रीपेमेंट चार्ज के बावजूद ब्याज में जो बचत होती है, वह आपके लिए फायदेमंद साबित होती है। इससे EMI का बोझ घटता है और लोन जल्दी खत्म भी हो जाता है।