देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इस स्थिति में फ्यूल रिटेलर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 20 रुपये और डीजल पर 100 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों में बदलाव नहीं किया गया है।
रिफाइनरी सेक्टर पर असर
वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों का असर तेल रिफाइन करने वाली कंपनियों पर साफ दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो कंपनियों के लिए इस नुकसान को झेलना मुश्किल हो सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
कितना बढ़ा कच्चे तेल का दाम
ईरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। यह करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इतनी बड़ी उछाल के बावजूद भारत में खुदरा कीमतों को स्थिर रखा गया है, जिससे उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिल रहा है।
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क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
उद्योग से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई के लिए भविष्य में कीमतें बढ़ा सकती हैं। खासकर चुनाव के बाद कीमतों में बदलाव की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि यह सिर्फ अनुमान हैं और कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
सरकार ने अफवाहों पर लगाई रोक
सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर फैल रही अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया है कि 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सरकार कीमतों को स्थिर रखकर आम जनता को राहत देने की कोशिश कर रही है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरती, तो आने वाले समय में नए फैसले लिए जा सकते हैं। अभी के लिए उपभोक्ताओं को राहत है, लेकिन बाजार की नजर वैश्विक हालात पर टिकी हुई है।