अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर देखने को मिली है, लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अभी भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने 29 मई को कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन पिछले 11 दिनों में चार बार हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।
11 दिनों में चार बार बढ़े दाम
चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियों ने लगातार कीमतों में बढ़ोतरी की है। 15 मई से शुरू हुई वृद्धि का सिलसिला 25 मई तक जारी रहा। इस दौरान दिल्ली में पेट्रोल कुल 7.35 रुपये और डीजल 7.82 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। बार-बार बढ़े दामों का असर परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक पर पड़ने लगा है।
महानगरों में क्या है स्थिति?
देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी काफी ऊंची हैं। दिल्ली के मुकाबले कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमत और ज्यादा है। कई राज्यों में टैक्स और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। राजधानी लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
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कच्चे तेल में गिरावट क्यों?
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों से तेल बाजार में कुछ राहत आई है। हालांकि भारतीय बास्केट क्रूड अभी भी 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव बरकरार है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा बोझ
अनुमान है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन पर रोजाना भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी गिरावट आने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत राहत नहीं मिल रही है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें लगातार नीचे आती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो आने वाले दिनों में कीमतों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। फिलहाल आम लोगों को राहत का इंतजार करना होगा, क्योंकि पेट्रोल और डीजल दोनों ही अभी महंगे स्तर पर बने हुए हैं।