देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 10 दिनों में ईंधन के दामों में 4 बार बढ़ोतरी हो चुकी है। इन लगातार बदलावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें 7 रुपये से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। यात्रा से लेकर सब्जी, दूध और दूसरी जरूरतों तक हर चीज महंगी होने की आशंका बढ़ गई है।
तेल कंपनियों का नुकसान जारी
बार-बार कीमतें बढ़ने के बाद भी तेल कंपनियां राहत में नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। हर दिन इतने बड़े घाटे के साथ काम करना आसान नहीं माना जा रहा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
होर्मुज संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की सबसे अहम लाइनों में गिना जाता है। भले ही शांति वार्ता की खबरें सामने आ रही हों, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। इसके अलावा समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ चुकी है, जिसका असर आगे कीमतों पर पड़ सकता है।
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कच्चे तेल ने दी राहत
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से राहत की खबर भी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है। वहीं दूसरे प्रमुख कच्चे तेल के दाम भी नीचे आए हैं। इससे उम्मीद बढ़ी है कि भारतीय तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव में कुछ कमी आ सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल सस्ता बना रहता है तो कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
सियासत भी हुई तेज
ईंधन की कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं। कई नेताओं ने बढ़ती कीमतों को आम आदमी पर आर्थिक बोझ बताया है। उनका कहना है कि इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर नहीं बल्कि हर घर के खर्च पर पड़ रहा है। इसी वजह से यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।
अब आगे क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी और बढ़ेंगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो राहत मिल सकती है। लेकिन वैश्विक हालात, युद्ध और परिवहन लागत जैसे कई कारक अभी भी चिंता की वजह बने हुए हैं। फिलहाल आम आदमी की नजर अब अगले दामों पर टिकी हुई है।