
उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) अब देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है. यहां का संरक्षण मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराह चुके हैं. इसी मॉडल की वजह से लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार मजबूत हो रहा है.
कैसे हुई बाघों की गिनती?
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) हर 4 साल में पूरे देश में बाघों की गणना करता है. साल 2022 में NTCA की रिपोर्ट के अनुसार, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 71 बाघ थे. इसके अलावा रिजर्व प्रशासन अपने स्तर पर भी गणना करता है. इसके लिए पूरे 602 वर्ग किलोमीटर के कोर एरिया को 316 हिस्सों (ग्रिड) में बांटा गया और वहां 632 ट्रैप कैमरे लगाए गए. कैमरों से मिले डेटा का आधुनिक तकनीक से विश्लेषण किया गया. बाघों की गिनती उनके शरीर पर बनी धारियों की पहचान से की गई. इस आंतरिक गणना में पता चला कि रिजर्व में अब कुल 79 बाघ हैं. यानी 2022 में जहां संख्या 71 थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 79 हो गई.
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इस तरह 2 साल में बाघों की संख्या में करीब 12% की वृद्धि हुई है. नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में रिजर्व में 53 मादा बाघ, 14 नर बाघ और 12 ऐसे बाघ हैं जिनका लिंग तय नहीं हो सका. गौर करने वाली बात यह है कि गिनती में 18 महीने से कम उम्र के बाघ शामिल नहीं किए जाते. विशेषज्ञों का कहना है कि पीलीभीत रिजर्व के करीब 30 से ज्यादा बाघ जंगल के बाहर भी घूमते हैं. यह संख्या कुल बाघों की लगभग 30-40% मानी जाती है. अगर बाहर घूम रहे बाघों को भी जोड़ा जाए, तो यहां कुल बाघों की संख्या 100 से अधिक हो जाती है.
क्यों खास है पीलीभीत का मॉडल?
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का खास संरक्षण मॉडल बाघों की सुरक्षा, भोजन और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने पर केंद्रित है. इसी वजह से यहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात भी है. कुल मिलाकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने एक बार फिर साबित किया है कि अगर सही तरीके से संरक्षण किया जाए तो बाघों का कुनबा लगातार बढ़ सकता है.