India Japan Investment : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में जापानी कारोबारियों को संबोधित करते हुए भारत को निवेश के लिए भरोसेमंद जगह बताया। उन्होंने कहा कि भारत में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाता है और सफल कारोबारी बनने के बाद किसी को अचानक गायब होने का डर नहीं रहता। उनके इस बयान को चीन के कारोबारी माहौल पर अप्रत्यक्ष तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
जैक मा का नाम लिए बिना निशाना
गोयल ने अपने संबोधन में चीन या अलीबाबा के संस्थापक जैक मा का नाम नहीं लिया। हालांकि, उन्होंने जिस कारोबारी के अचानक गायब होने और बाद में जापानी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर सामने आने की बात कही, उससे जैक मा की कहानी का संदर्भ साफ नजर आया। मा 2020 में चीनी वित्तीय नियामकों की आलोचना के बाद कुछ समय तक सार्वजनिक नजरों से दूर रहे थे।
भारत को बताया भरोसेमंद निवेश ठिकाना
गोयल ने जापानी निवेशकों को भारत में कारोबार के लिए भरोसेमंद माहौल का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत में डेटा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा को महत्व दिया जाता है। उनका संदेश था कि कंपनियां भारत में निवेश करते समय अपने डेटा, तकनीक और कारोबारी हितों को लेकर आश्वस्त रह सकती हैं। उन्होंने भारत को सिर्फ चीन का विकल्प मानने के बजाय एक स्वतंत्र और बड़े अवसर वाले बाजार के रूप में पेश किया।
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‘प्लस वन’ से आगे भारत की रणनीति
दुनियाभर की कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने और अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने की कोशिश कर रही हैं। इसी बीच भारत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और निवेश के बड़े केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। गोयल ने कहा कि भारत को केवल ‘प्लस वन’ देश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बड़े घरेलू बाजार और बढ़ती उत्पादन क्षमता को उन्होंने भारत की प्रमुख ताकत बताया।
जापान से निवेश बढ़ाने पर जोर
गोयल की जापान यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबारी और निवेश संबंधों को मजबूत करना है। जापानी कंपनियों ने 2000 से 2026 के बीच भारत में करीब 48.14 अरब डॉलर का निवेश किया है। अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। जापान ने अगले दशक में भारत में करीब 60,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य भी रखा है।