PM E-DRIVE Subsidy : इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए सरकार ने PM E-DRIVE स्कीम को लेकर बड़ा बदलाव किया है। भारी उद्योग मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक योजना की अवधि अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है। इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और EV मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है। योजना के लिए कुल 11,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
दोपहिया पर इंसेंटिव हुआ आधा
योजना की अवधि बढ़ने के साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने वालों को मिलने वाले इंसेंटिव में कटौती की गई है। अब प्रति किलोवाट-घंटे मिलने वाला इंसेंटिव 5,000 रुपये से घटाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही एक इलेक्ट्रिक दोपहिया पर अधिकतम इंसेंटिव 5,000 रुपये तय किया गया है। यानी पहले मिलने वाले अधिकतम 10,000 रुपये के मुकाबले अब खरीदार को आधा लाभ मिलेगा।
1.5 लाख तक वाले EV को फायदा
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए इंसेंटिव का लाभ लेने की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तय की गई है। इस श्रेणी के लिए सरकार ने 2,767 करोड़ रुपये का फंड सपोर्ट रखा है। हालांकि, हर वाहन को तय अधिकतम राशि नहीं मिलेगी। इंसेंटिव की गणना निर्धारित प्रति kWh दर और वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 फीसदी में से जो कम होगा, उसके आधार पर की जाएगी।
ये भी पढ़ें : अस्पतालों की मनमानी फीस पर लगेगा ब्रेक? इलाज, दवाओं और बीमा को लेकर आया बड़ा प्रस्ताव
सरकार कर सकती है दरों की समीक्षा
PM E-DRIVE को फंड-लिमिटेड स्कीम के तौर पर लागू किया गया है। यानी निर्धारित बजट समाप्त होने पर योजना या उसके किसी हिस्से को तय समयसीमा से पहले भी बंद किया जा सकता है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में बदलाव और बाजार की स्थिति को देखते हुए प्रति kWh इंसेंटिव की समीक्षा भी कर सकती है। ऐसे में भविष्य में सब्सिडी की दर में बदलाव संभव है।
क्लेम के लिए 2027 अंतिम तारीख
भले ही PM E-DRIVE स्कीम 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी, लेकिन इसके तहत किसी भी कंपोनेंट के लिए क्लेम जमा करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2027 तय की गई है। इसलिए योजना का लाभ लेने वाली कंपनियों और संबंधित लाभार्थियों को क्लेम की समयसीमा का खास ध्यान रखना होगा। योजना की अवधि बढ़ने से EV सेक्टर को लंबी अवधि तक सरकारी समर्थन मिलेगा, लेकिन इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदारों के लिए कम इंसेंटिव का असर खरीदारी की लागत पर पड़ सकता है।