Hospital Fees Reform : महंगे इलाज से परेशान मरीजों को राहत देने के लिए संसद की एक स्थायी समिति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई अहम सिफारिशें की हैं। प्रस्ताव लागू होने पर प्राइवेट अस्पतालों के कमरे और इलाज से जुड़े शुल्क में पारदर्शिता बढ़ सकती है। समिति ने अस्पतालों के लिए ऐसा कानूनी तंत्र बनाने की सिफारिश की है, जिसके तहत मरीज को भर्ती करने से पहले सभी शुल्कों की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी हो।
ओवरबिलिंग पर लगेगी निगरानी
समिति ने अत्यधिक बिलिंग और बीमा से जुड़े विवादों के लिए स्वतंत्र ओम्बडमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य मरीजों की शिकायतों का तेजी से समाधान करना है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में कमरों के किराए पर उचित सीमा तय करने के लिए व्यवस्था बनाने की सिफारिश की गई है। इससे इलाज के दौरान अचानक बढ़ने वाले अस्पताल खर्च पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव हो सकता है।
इलाज पर जीरो-रेटेड GST प्रस्ताव
स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा GST छूट के बजाय जीरो-रेटेड GST के दायरे में लाने की सिफारिश भी की गई है। समिति के मुताबिक इससे अस्पतालों को महंगे मेडिकल उपकरणों और बड़े पूंजीगत खर्च पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल सकता है। इसका फायदा आगे चलकर मरीजों के इलाज की लागत कम करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी सिफारिश है और इसके लागू होने के बाद ही वास्तविक असर स्पष्ट होगा।
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दवाओं की कीमत पर भी सख्ती
कैंसर और अन्य जीवन रक्षक दवाओं पर अनुचित ट्रेड मार्जिन को सीमित करने के लिए मल्टी-सेक्टरल ऑडिट की सिफारिश की गई है। समिति ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए बिना उचित नियंत्रण के एंटीबायोटिक्स की बिक्री पर सख्ती की बात कही है। मानव खाद्य श्रृंखला में दवा प्रतिरोध कम करने के लिए पशुधन और सी-फूड प्रोसेसिंग में कुछ एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा गया है।
बीमा क्लेम के लिए 30 दिन
सरकारी स्वास्थ्य बीमा दावों के निपटारे के लिए 30 दिन की समयसीमा तय करने की सिफारिश की गई है। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर संबंधित अस्पताल को पेनल्टी और ब्याज देने का प्रावधान सुझाया गया है। इसके अलावा करीब 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 4,000 से 6,000 रुपये सालाना प्रीमियम वाली स्वैच्छिक स्वास्थ्य बीमा योजना की सिफारिश की गई है। इसमें OPD और डायग्नोस्टिक सेवाओं का कवरेज भी शामिल करने का प्रस्ताव है। साथ ही ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए आसान कर्ज, टैक्स हॉलिडे और हेल्थकेयर कैपिटल फंड जैसे उपाय सुझाए गए हैं।