
चीन के तियानजिन पहुंचे PM मोदी का रेड कार्पेट स्वागत किया गया. एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय ने तिरंगा लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए. मोदी यहां रविवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसका सबसे बड़ा आकर्षण उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सात साल बाद होने वाली ऐतिहासिक मुलाकात मानी जा रही है. इस बैठक में भारत-चीन रिश्तों की समीक्षा, व्यापारिक समझौते और सीमा विवाद जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.
रिश्तों को मिल सकती है नई दिशा
बता दें ये मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं. पिछले साल रूस में हुए ब्रिक्स समिट में दोनों नेताओं ने सीमा पर पेट्रोलिंग को लेकर सहमति जताई थी, लेकिन अब तियानजिन की ये बातचीत भविष्य के रिश्तों की नई दिशा तय कर सकती है. अमेरिका-चीन तनाव के बीच भारत की भूमिका और भी अहम हो गई है, क्योंकि वॉशिंगटन द्वारा लगाए गए टैरिफ विवाद ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है. ऐसे में मोदी-शी की मुलाकात पर न सिर्फ एशिया बल्कि अमेरिका और यूरोप की भी नजरें टिकी हैं.
ये भी पढ़ें : PM Modi को गाली देने पर बवाल, BJP का हंगामा, Prashant Kishor ने भी जताई नाराजगी
रूस के राष्ट्रपति से भी होगी मुलाकात
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तियानजिन समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात हो सकती है. इसमें भारत की तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव, टैरिफ विवाद और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. रूस-भारत रिश्तों में ऊर्जा सबसे बड़ा आधार है और इस बातचीत से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.
सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी का मंच
आपको बता दें SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशियाई देश शामिल हैं. भारत 2017 में इसका सदस्य बना और 2022-23 में अध्यक्षता भी कर चुका है. ये मंच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी पर काम करता है. ऐसे में तियानजिन का ये दौरा प्रधानमंत्री मोदी के लिए न केवल भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने का अवसर है, बल्कि मोदी-शी मुलाकात एशिया की दिशा बदलने वाली ऐतिहासिक शुरुआत भी साबित हो सकती है.