देश की राजधानी दिल्ली में संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और उसके भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की गई। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और समुद्री मार्गों पर बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
तेल आपूर्ति और भारतीय नाविकों पर चिंता
दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस मार्ग में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। वहीं समुद्री जहाजों पर हुए हमलों और भारतीय नाविकों की मौत की घटनाओं को लेकर भी सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। भारत ने इस मुद्दे को अमेरिका और ईरान के समक्ष भी उठाया है।
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कच्चे तेल की कीमतों से राहत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत अप्रैल 2026 में 114.5 डॉलर प्रति बैरल थी, जो जुलाई 2026 (22 जुलाई तक) में घटकर 77.6 डॉलर प्रति बैरल रह गई। कीमतों में आई इस गिरावट से आने वाले समय में महंगाई के दबाव में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने बताए राहत के कदम
सरकार ने संसद को बताया कि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई गई है और अग्रिम खरीद के जरिए पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार किया गया है। किसानों के लिए उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए गैस आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
उद्योग और कारोबार को भी राहत
बढ़ते समुद्री भाड़े और बीमा लागत को देखते हुए सरकार ने 'भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल राहत' योजना शुरू की है। इसके अलावा कुछ चुनिंदा रसायनों पर सीमा शुल्क में अस्थायी राहत दी गई है। निर्यातकों के लिए RoDTEP योजना के लाभ दोबारा शुरू किए गए हैं, जबकि ECLGS 5.0 के तहत उद्योगों को आसान ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।