प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कर्नाटक के मांड्या जिले में लोगों से 9 अहम संकल्प लेने की अपील की। वह श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरि मठ पहुंचे, जहां उन्होंने गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाज, पर्यावरण और संस्कृति को जोड़ने वाला संदेश दिया। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा भी मौजूद रहे।
9 संकल्पों में क्या खास
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में जल संरक्षण और बेहतर जल प्रबंधन को सबसे अहम बताया। इसके साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण करने की अपील की। उन्होंने धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने, ‘वोकल फॉर लोकल’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और घरेलू पर्यटन को अपनाने की बात कही। इसके अलावा रसायन-मुक्त प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज को अपनाने और खाने में तेल का कम उपयोग करने पर भी जोर दिया।
मंदिर उद्घाटन का विशेष महत्व
गुरु भैरवैक्य मंदिर का निर्माण पूज्य संत डॉ बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति में किया गया है। यह मंदिर पारंपरिक द्रविड़ शैली में तैयार किया गया है और इसे उनकी विरासत को समर्पित किया गया है। महास्वामीजी ने अपने जीवन में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया और समाज सेवा को सर्वोच्च धर्म माना।
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समाज सेवा और आध्यात्म का संगम
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे संतों का जीवन समाज को दिशा देने वाला होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास तभी सार्थक है जब उसमें संस्कृति और सेवा का भाव शामिल हो। वोक्कालिगा समुदाय से जुड़े इस मठ का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी बड़ा माना जाता है।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने हालिया विकास कार्यों का भी जिक्र किया। एक दिन पहले उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया था, जिसकी लागत करीब 12 हजार करोड़ रुपए है। यह 213 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे यात्रा समय को 6 घंटे से घटाकर लगभग ढाई घंटे कर देगा।
प्रकृति और विकास का संतुलन
इस कॉरिडोर की खासियत 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ सेक्शन है, जिसे एशिया के सबसे लंबे सेक्शन में गिना जा रहा है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों के आवागमन पर असर न पड़े। पीएम मोदी ने इसे विकास और पर्यावरण के संतुलन का उदाहरण बताया।
संदेश साफ, दिशा स्पष्ट
कर्नाटक से पीएम मोदी का संदेश साफ रहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है। उनके 9 संकल्प सिर्फ अपील नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत माने जा रहे हैं।