मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बड़ा बयान देते हुए साफ कहा कि शांति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है। उन्होंने चेताया कि युद्ध का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सप्लाई और मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
ऊर्जा और सप्लाई पर गहराया संकट
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध के चलते व्यापार के अहम रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। खासतौर पर गैस, कच्चा तेल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर दबाव बना है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है, जहां कई भारतीय क्रू मेंबर्स भी फंसे हुए हैं।
भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
पीएम मोदी ने बताया कि खाड़ी देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। ईरान से भी 1,000 से अधिक भारतीयों को निकाला गया है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं।
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कूटनीति से समाधान की कोशिश
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार ईरान, अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के संपर्क में है और संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों पर हमले और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
तेल-गैस सप्लाई बनाए रखने की कोशिश
सरकार ने ऊर्जा सप्लाई बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी किए हैं। पीएम ने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से कच्चा तेल और एलपीजी के जहाज भारत पहुंचे हैं। आने वाले समय में भी सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।
मानवता और शांति पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि युद्ध किसी के हित में नहीं है और इससे केवल संकट बढ़ता है। भारत लगातार सभी पक्षों को शांति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि हालात जल्द सामान्य हो सकें।