
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार इसको नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। यहां पर उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ये जानते थे कि अगर भारत को प्रगति के पथ पर चलना है तो उसे गुलामी की जंजीरों को खत्म करना होगा। इसके साथ उन जंजीरों को भी खत्म करना होगा, जिनसे हमारे समाज में जंजीरें बंधी थीं। पीएम मोदी ने कहा कि यही वजह है कि स्वामी दयानंद ने हमेशा जातिवाद, छुआतछूत और भेदभाव की निंदा की।
प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था रहा आर्य समाज
पीएम मोदी ने कहा,"क्रांतिकारियों को आर्य समाज से ही प्रेरणा प्राप्त हुई। उन्होंने कुछ समर्पित किया था. राजनीतिक वजह से स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज को सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार होना चाहिए था। आर्य समाज अपनी स्थापना से लेकर आजतक प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था रहा है। ये निर्भीक होकर अपनी बात को रखने वाली संस्था है। किसी भी तरह की विदेशी मानसिकता को आर्य समाज से हमेशा चुनौती मिली है।
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समय नए सवाल करता है
पीएम मोदी ने संबोधित करते हुए कहा,भारत कई मायनों में खास है। ये धरती इसकी सभ्यता,वैदिक परंपरा युगो से अमर है। किसी भी कालखंड में कई तरह की नई चुनौतियां आती हैं, समय नए सवाल करता है। उस समय कोईै न कोई महान विभूति अवतरित होती है। कोई न कोई महर्षि समाज को नई दिशा प्रदान करता है। इस तरह की परंपरा के दयानंद सरस्वती भी थे।
महान जननायकों ने आर्य समाज से प्रेरणा ली
उन्होंने कहा, " अंग्रेज हमारी मान्यताओं को नीचा दिखाने में लगे थे। ऐसा करके वे भारत को गुलाम सही ठहराने की कोशिश करते थे. ऐसे ही कठिन समय पर एक युवा संन्यासी आता है, और हीन भावना में घिरे भारतीय समाज को झकझोरता है. उन्होंने दबी-कुचली भावना को उठाने का काम किया। लाला लाजपत राय और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे महान जननायकों ने आर्य समाज से प्रेरणा ली."