PNG Connection Rules : देशभर में एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पाइप वाली रसोई गैस यानी PNG को तेजी से बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उन इलाकों में विशेष अभियान चलाया जाएगा जहां PNG नेटवर्क पहले से उपलब्ध है। सरकार चाहती है कि ऐसे क्षेत्रों के लोग धीरे-धीरे एलपीजी की जगह PNG अपनाएं।
नोटिस के बाद मिलेगा 90 दिन का समय
सरकार के मार्च में जारी आदेश के अनुसार जिन इलाकों में PNG लाइन पहुंच चुकी है, वहां उपभोक्ताओं को पहले नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस मिलने के बाद लोगों को PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करने हेतु 90 दिन यानी तीन महीने का समय दिया जाएगा। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं किया जाता है, तो संबंधित उपभोक्ता की एलपीजी सप्लाई बंद की जा सकती है।
एक घर में नहीं रहेंगे दोनों कनेक्शन
नियमों के मुताबिक किसी भी घर में एक साथ PNG और LPG दोनों कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी। PNG कनेक्शन मिलने के बाद उपभोक्ता को अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना पड़ेगा। इसके अलावा तेल कंपनियों और एलपीजी वितरकों को ऐसे उपभोक्ताओं को नया एलपीजी कनेक्शन जारी करने या सिलेंडर रिफिल देने से भी रोका जा सकता है। सरकार का उद्देश्य गैस आपूर्ति व्यवस्था को एकरूप बनाना है।
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एलपीजी छोड़ने वालों को मिलेगी सुविधा
सरकार ने मई में नियमों में कुछ राहत भी दी थी। अब यदि कोई उपभोक्ता एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करता है तो उसे ट्रांसफर वाउचर दिया जाएगा। भविष्य में अगर वह ऐसी जगह शिफ्ट होता है जहां PNG सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो इसी वाउचर के आधार पर दोबारा एलपीजी कनेक्शन लिया जा सकेगा। इससे किराएदारों, छात्रों और ट्रांसफर वाली नौकरियों में काम करने वाले लोगों को फायदा होगा।
हर जिले में बनेगी विशेष कमेटी
PNG कनेक्शन बढ़ाने के लिए हर जिले में PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी गैस कंपनियों, जिला प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगी। सोसाइटी, आरडब्ल्यूए और आवासीय क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कनेक्शन शिविर भी लगाए जाएंगे। साथ ही राज्यों को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार PNG पर इतना जोर क्यों दे रही है
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि PNG से गैस आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित हो सकती है। इससे सिलेंडर की ढुलाई और लॉजिस्टिक्स पर होने वाला खर्च कम होगा। साथ ही ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जहां पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को PNG अपनाने से बेहतर और लगातार गैस आपूर्ति का लाभ मिल सकता है।