Poison in every puff: तंबाकू का हर रूप, चाहे वह सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या खैनी हो शरीर के लिए धीरे-धीरे जहर साबित होता है। यह सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि दिल, दिमाग, मुंह, त्वचा, हड्डियों, किडनी और प्रजनन क्षमता जैसे महत्वपूर्ण अंगों को बर्बाद करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल लाखों लोगों की मौत तंबाकू की वजह से होती है। WHO के मुताबिक, भारत में करीब 25 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू शरीर में ऐसे असर करता है जैसे कोई धीमा जहर — जो समय के साथ अंगों को सड़ा देता है और इंसान को भीतर से कमजोर बना देता है।
दिल, फेफड़े और दिमाग पर सबसे घातक असर
तंबाकू दिल की धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, इसका धुआं फेफड़ों की नलियों पर परत की तरह जम जाता है और सांस लेने की क्षमता घटा देता है। लंबे समय तक सेवन करने से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। दूसरी ओर, निकोटिन कुछ देर के लिए सुकून देता है लेकिन धीरे-धीरे ब्रेन के ब्लड फ्लो को कम कर देता है, जिससे याददाश्त कमजोर और डिप्रेशन बढ़ जाता है। गुटखा और पान मसाला मुंह और गले का कैंसर पैदा करते हैं, जबकि त्वचा की चमक खत्म कर व्यक्ति को उम्र से पहले बूढ़ा बना देते हैं।
जीवन को छोटा कर देता है तंबाकू
तंबाकू पेट के एसिड को बढ़ाकर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और लिवर, किडनी व आंतों को प्रभावित करता है। यह हड्डियों को कमजोर कर देता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता है। तंबाकू छोड़ने के लिए व्यक्ति को धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए — सेवन कम करें, ध्यान और योग अपनाएं, सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें और परिवार का सहारा लें। याद रखें, हर कश शरीर से एक साल छीन लेता है — इसलिए आज ही निर्णय लें, क्योंकि कल बहुत देर हो सकती है।