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Police not registering FIR: अगर किसी घटना या अपराध का शिकार होने के बाद आप थाने जाते हैं और पुलिस आपकी शिकायत दर्ज करने से मना कर देती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि न्याय की राह बंद हो गई। भारतीय कानून हर नागरिक को यह अधिकार देता है कि उसकी शिकायत सुनी जाए और FIR दर्ज हो। लेकिन जब ऐसा नहीं होता, तब भी आपके पास कई रास्ते खुले रहते हैं। इन अधिकारों को जानना और सही जगह पर कार्यवाही करना आपके लिए बेहद ज़रूरी है।
कहां कर सकते हैं शिकायत?
अगर थाने में पुलिस FIR लिखने से मना कर दे, तो आप सीधे उस थाने के वरिष्ठ अधिकारी जैसे एसपी (SP) या डीएसपी (DSP) से संपर्क कर सकते हैं और लिखित शिकायत दे सकते हैं। अगर वहां भी समाधान न मिले तो मजिस्ट्रेट के पास जाकर धारा 156(3) CrPC के तहत FIR दर्ज करने की अर्जी दी जा सकती है। इसके अलावा कई राज्यों में पुलिस की ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध हैं, जहां आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं। कुछ विशेष मामलों में महिला आयोग या मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने का विकल्प भी मौजूद है।
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आपके कानूनी अधिकार
भारतीय कानून के अनुसार, हर नागरिक को यह अधिकार है कि पुलिस उसकी शिकायत दर्ज करे। आप थाने में शिकायत मौखिक या लिखित दोनों तरीकों से दे सकते हैं और उसकी कॉपी मुफ्त में लेने का हक भी रखते हैं। अगर पुलिस FIR लिखने से मना करती है, तो आप न केवल बड़े अधिकारियों बल्कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, मानवाधिकार आयोग या कोर्ट तक भी जा सकते हैं। इतना ही नहीं, जिस अधिकारी ने शिकायत दर्ज करने से मना किया, उसके खिलाफ भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। यानी आपको अपने अधिकार पता हों तो इंसाफ पाने से कोई नहीं रोक सकता।