Maharashtra Budget Session: महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है और इसके हंगामेदार रहने के संकेत मिल रहे हैं। महा विकास आघाड़ी (एमवीए) ने सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए कई मुद्दों पर घेराव की रणनीति बनाई है। विपक्ष ने सरकार को आर्थिक, प्रशासनिक और नैतिक रूप से विफल बताते हुए सत्र के दौरान जोरदार विरोध की तैयारी की है।
सियासी दूरी
एमवीए ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित पारंपरिक ‘चाय बैठक’ का बहिष्कार किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवाद की परंपरा निभाने के बजाय औपचारिकता निभा रही है। वहीं, शरद पवार की पार्टी की अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
किसान आत्महत्या
विपक्ष ने यवतमाल में किसानों की आत्महत्या के मामलों को उठाते हुए सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। साथ ही राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई गई। एमवीए का कहना है कि हजारों करोड़ रुपये के कर्ज से वित्तीय संतुलन बिगड़ रहा है और कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
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श्वेत पत्र की मांग
एमवीए ने सरकार के दावोस दौरे को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि विदेशी निवेश के बड़े दावे किए गए, लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए। सार्वजनिक धन के उपयोग और निवेश समझौतों की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कानून व्यवस्था
नशा कारोबार, महिला सुरक्षा और लापता मामलों को लेकर भी सरकार को घेरा गया। 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा देने और फिर उसे रद्द करने के फैसले पर प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए। कुल मिलाकर, महा विकास आघाड़ी ने संकेत दिए हैं कि बजट सत्र के दौरान सरकार को हर मोर्चे पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।