Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने इस विषय को जोर-शोर से उठाया है। सपा का आरोप है कि राज्य में निकलने वाली सरकारी भर्तियों में OBC, SC और ST वर्गों के अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण के नियमों का पालन नहीं हो रहा और PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज के हिस्से की नौकरियां जानबूझकर कम की जा रही हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया और कहा कि यह लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
भर्तियों में कटौती, आंकड़ों का आरोप
अखिलेश यादव ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में हुई कई बड़ी भर्तियों में आरक्षित वर्गों के हजारों पद घटा दिए गए। उन्होंने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती, कृषि विश्वविद्यालय, सहकारी बैंक और राजस्व लेखपाल जैसी भर्तियों का हवाला देते हुए कहा कि तय संख्या के मुकाबले कहीं कम पद भरे गए। सपा का आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को बाहर करने के लिए नियमों की गलत व्याख्या की गई। अखिलेश के मुताबिक यह प्रक्रिया किसी एक भर्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक सोची-समझी नीति के तहत PDA समाज के हक को कमजोर किया गया।
कोर्ट की राह, आंदोलन की चेतावनी
सपा प्रमुख ने कहा कि भर्तियों में ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ जैसे फॉर्मूलों का इस्तेमाल कर आरक्षित वर्गों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इन मामलों पर सवाल उठे तो सरकार ने जांच समितियों की घोषणा कर मुद्दे को दबाने की कोशिश की। अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी इस लड़ाई को अदालत तक ले जाएगी और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर भी आंदोलन करेगी। उनका कहना है कि आरक्षण केवल कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन की बुनियाद है और इसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।