.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3D55b5329e-48aa-4785-8724-691c0cb8e53a&w=3840&q=75)
Political turmoil in Nepal: नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता गहराती जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम सरकार को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे नहीं बढ़ता दिख रहा है। नागरिक समाज से जुड़े संगठन ‘बृहत नागरिक आंदोलन’ (बीएनए) ने दावा किया है कि देश में राजशाही बहाल करने की साजिश रची जा रही है। संगठन का कहना है कि नेपाली सेना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।
‘जेन-जेड आंदोलन’ और राजशाही की वापसी का विवाद
बीएनए ने आरोप लगाया है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों को बहाना बनाकर सेना की मध्यस्थता में राजशाही लौटाने, धर्मनिरपेक्षता खत्म करने और संघीय ढांचे को कमजोर करने की योजना बनाई जा रही है। संगठन ने इसे लोकतंत्र और गणतंत्र के खिलाफ खतरा बताया। उसका कहना है कि जेन-जेड आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध का विरोध करना था, न कि असंवैधानिक ताकतों को बढ़ावा देना।
यह भी देखेंःNew facility at airports: हवाई अड्डों पर नई सुविधा, अमित शाह ने शुरू किया फास्ट ट्रैक इमीग्रेशन प्रोग्राम
.युवाओं के आंदोलन से बढ़ा दबाव
हाल ही में स्कूली छात्रों और युवाओं ने ‘जेनरेशन Z’ के बैनर तले बड़े पैमाने पर आंदोलन किया था। सरकार को सोशल मीडिया पर लगाए प्रतिबंध हटाने पड़े, लेकिन इसके बाद सत्ता संकट गहराया। अब सेना की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि सियासी दल आपसी सहमति से रास्ता नहीं निकाल पाए, तो लोकतंत्र और स्थिरता दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।