Akhilesh Yadav raises questions: उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित परीक्षाओं को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, पहले SI भर्ती परीक्षा और अब कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा के एक प्रश्न ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
विवादित पहेली से बढ़ा मुद्दा
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों की संस्कृत परीक्षा में एक पहेली पूछी गई—“बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है परंतु पंडित नहीं है।” इस सवाल को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। कुछ लोगों का मानना है कि यह प्रश्न एक विशेष समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
अखिलेश यादव का आरोप
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसी एक वर्ग का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रश्न जानबूझकर तैयार किए जा रहे हैं और इसके पीछे सत्ता का इशारा हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रश्नपत्र बनाने वाली समितियों में विविधता की कमी है।
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प्रश्नपत्र निर्माण पर उठे सवाल
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि यदि संबंधित समाज के लोग प्रश्नपत्र बनाने वाली टीम में शामिल होते, तो शायद इस तरह के सवाल सामने नहीं आते। उन्होंने संकेत दिया कि परीक्षा प्रणाली में निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी वर्ग को आहत महसूस न हो।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
इस मुद्दे के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। अब यह विवाद केवल एक सवाल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी बहस छिड़ गई है।
उप्र में फिर हुआ एक ‘समाज विशेष’ का अपमान। इससे साबित हो गया है कि ये सब जानबूझकर सत्ता के इशारे पर हो रहा है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 18, 2026
असली सवाल, केवल प्रश्न पर नहीं बल्कि इस बात पर भी उठना चाहिए कि क्या प्रश्नपत्र बनानेवाले लोगों में भी सत्ता सजातीय लोगों को डाल दिया गया है। अगर जानबूझकर टारगेट किये… pic.twitter.com/hXhuNW8aMl