Praggnanandhaa Grand Chess Tour : भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद ने शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने ग्रैंड चेस टूर 2026 का खिताब जीतकर ऐसा कारनामा किया, जो इससे पहले कोई भी भारतीय खिलाड़ी नहीं कर पाया था। सेंट लुइस में खेले गए फाइनल मुकाबले में प्रज्ञानंद ने दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी फैबियानो कारूआना को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। इस जीत के साथ उन्होंने भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय शतरंज जगत में और ऊंचा कर दिया।
मुश्किल में थे प्रज्ञानंद
फाइनल मुकाबले की शुरुआत प्रज्ञानंद के लिए आसान नहीं रही। क्लासिकल मुकाबलों के बाद वह 3-9 के स्कोर से पीछे चल रहे थे। उस समय ऐसा लग रहा था कि खिताब उनके हाथ से निकल सकता है। कई विशेषज्ञ भी मान रहे थे कि कारूआना मजबूत स्थिति में हैं और वापसी करना बेहद कठिन होगा। लेकिन प्रज्ञानंद ने हार नहीं मानी और धैर्य के साथ मुकाबले में बने रहे।
रैपिड में बदली तस्वीर
इसके बाद रैपिड मुकाबलों में प्रज्ञानंद ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने लगातार दो मुकाबले जीतकर स्कोर को 11-9 तक पहुंचा दिया। अचानक मैच का पूरा माहौल बदल गया और दबाव कारूआना पर आ गया। भारतीय खिलाड़ी की यह वापसी दर्शाती है कि उन्होंने मानसिक रूप से खुद को कितना मजबूत बनाया है। यही प्रदर्शन उनके लिए खिताबी दौड़ में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
ब्लिट्ज में दिखाया दम
रैपिड मुकाबलों के बाद ब्लिट्ज राउंड में भी रोमांच जारी रहा। कारूआना ने एक मुकाबला जीतकर स्कोर 12-12 से बराबर कर दिया। इसके बावजूद प्रज्ञानंद ने संयम नहीं खोया। उन्होंने अगले ब्लिट्ज मुकाबले में जीत दर्ज कर फिर बढ़त बना ली। अंतिम मुकाबले में उन्हें सिर्फ ड्रॉ की जरूरत थी और उन्होंने शानदार रणनीति के साथ यह लक्ष्य हासिल कर लिया। इस तरह खिताब पर उनका कब्जा पक्का हो गया।
करोड़ों की इनामी राशि
इस ऐतिहासिक जीत के साथ प्रज्ञानंद को 2 लाख डॉलर यानी करीब 1.91 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली। इतना ही नहीं, उन्होंने अगले साल होने वाले ग्रैंड चेस टूर के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया। पूरे 2026 सर्किट में उनकी कुल कमाई 4 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई। कम उम्र में यह उपलब्धि उनके शानदार करियर की एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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भारत के लिए बड़ा संकेत
प्रज्ञानंद की यह जीत सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत का भी संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में भारत के युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना रहे हैं। प्रज्ञानंद ने जिस तरह 6 अंकों की बड़ी कमी को पूरा कर खिताब जीता, उसने उनके आत्मविश्वास और क्षमता को साबित कर दिया। अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजर उनके अगले बड़े टूर्नामेंट पर होगी, जहां उनसे और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।