PM message on Energy Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और इसका असर लगभग हर देश पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि जैसे भारत ने कोविड काल की चुनौतियों का सामना किया, वैसे ही देशवासी इस संकट से भी मजबूती के साथ बाहर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में शांति, संयम और सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
जिम्मेदारी सभी की
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा संकट जैसे हालात से निपटने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज के हर वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने राजनीतिक दलों, मीडिया, युवाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें। उनके अनुसार, जब देश एकजुट होकर काम करता है तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।
दहशत फैलाने से बचने की सलाह
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग एलपीजी को लेकर अनावश्यक डर और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहें संकट के समय हालात को और जटिल बना सकती हैं। सरकार लगातार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है और नागरिकों को किसी भी प्रकार की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है।
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रणनीतिक भंडार में बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता को काफी मजबूत किया है। देश के पास अब 50 लाख टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है और इसे और बढ़ाने की दिशा में काम जारी है। इसके अलावा, घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जिससे करोड़ों परिवारों को सीधा लाभ मिला है।
विकास की रफ्तार बरकरार
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और नेता भी मानते हैं कि आने वाले समय में भारत विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, देश की स्थिर प्रगति और मजबूत नीतियां भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली बना रही हैं।