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Private hospitals: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि ये अस्पताल मरीजों को सिर्फ भर्ती करने और पैसा कमाने का जरिया मानते हैं, जैसे मरीज इंसान नहीं बल्कि एटीएम हों. एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अस्पताल ने एक गंभीर मरीज को बिना उचित इलाज के सिर्फ ICU में रखकर लाखों रुपये का बिल थमा दिया, जबकि इलाज की जगह सिर्फ दिखावे के ट्रीटमेंट किए गए. कोर्ट ने इसे चिकित्सा के नाम पर धोखाधड़ी बताया.
बिना डॉक्टर के कर रहे इलाज, मरीज खतरे में
कोर्ट ने कहा कि कुछ निजी अस्पताल बिना अनुभवी डॉक्टरों के मरीजों का इलाज कर रहे हैं. एक मामले में डॉक्टर की गैरहाजिरी में मरीज को ICU में भर्ती किया गया और जब मरीज की हालत बिगड़ी तो इलाज की पूरी जिम्मेदारी नर्सों और जूनियर स्टाफ पर डाल दी गई. अस्पताल ने बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह लिए मरीज को बेवजह वेंटिलेटर पर रखा, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती चली गई। कोर्ट ने अस्पतालों की इस लापरवाही को जानलेवा बताया और कहा कि यह सीधे-सीधे मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ है.
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लाइसेंस और योग्यता के बिना ICU चला रहे अस्पताल
हाईकोर्ट ने साफ किया कि ICU संचालन के लिए योग्य डॉक्टर और लाइसेंस होना जरूरी है, लेकिन कई अस्पताल 12वीं पास कर्मचारियों से ही गंभीर मरीजों का इलाज करवा रहे हैं. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे अस्पतालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए जो बिना अनुमति ICU चला रहे हैं और लोगों की जान से खेल रहे हैं. कोर्ट ने इस मामले में अस्पताल प्रशासन से विस्तृत जवाब भी मांगा है.