अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच लंबे तनाव के बाद दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान होते ही भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग देशों की भूमिका पर कटाक्ष करते हुए एक तरह से वैश्विक समीकरणों की तस्वीर पेश की।
किसे क्या मिला—प्रियंका का तंज
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इस सीजफायर में हर देश को कुछ न कुछ हासिल हुआ। उनके मुताबिक, ईरान को अपना पक्ष रखने का मौका मिला, अमेरिका अपनी साख बचाने में कामयाब रहा और इजरायल को हकीकत का सामना करना पड़ा। वहीं उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान को “थैंक्यू नोट” मिला, भारत को उसका तेल मिल गया और दुनिया को फिलहाल के लिए शांति नसीब हुई। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है।
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भारत की भूमिका पर उठे सवालों का जवाब
प्रियंका चतुर्वेदी ने उन सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें भारत की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही थी। उन्होंने साफ कहा कि यह युद्ध भारत का नहीं था, इसलिए हर वार्ता में भारत की भूमिका होना जरूरी नहीं है। उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना वजह भारत की भागीदारी को लेकर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है।
ईरान की शर्तें और आगे की राह
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के सामने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें भविष्य में हमले न करने, प्रतिबंध हटाने और नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी पक्ष ने भी संकेत दिए हैं कि वह कुछ शर्तों पर सहमति के लिए तैयार है। खबर है कि इस मसले पर आगे की बातचीत के लिए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बैठक हो सकती है, जो मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।