Maulana Mahmood Madani: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू और मुसलमान सदियों से साथ रहते आए हैं और यही इस देश की साझा विरासत है। मौलाना मदनी के अनुसार, मुसलमानों की धार्मिक आस्था, उनका एकेश्वरवाद और इबादत की पद्धति किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा इस्लाम को लेकर इस तरह के बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्तव्यों से सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है और देश में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
तौहीद की आस्था, पूजा का फर्क
मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम की बुनियाद तौहीद और रिसालत पर टिकी है, जिसमें किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की मिट्टी, प्रकृति और पर्यावरण से प्रेम करना एक बात है, जबकि उनकी पूजा करना बिल्कुल अलग विषय है। भारतीय मुसलमान देश से उतना ही प्रेम करते हैं जितना कोई और नागरिक, लेकिन ईश्वर के अलावा किसी और की पूजा उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना था कि ‘प्रिय’ और ‘पूज्य’ के फर्क को न समझना या नजरअंदाज करना आपसी समझ में बाधा पैदा करता है।
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राष्ट्र की अवधारणा, संवाद की जरूरत
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि भारत में राष्ट्र की नींव ‘वतन’ पर आधारित है, न कि किसी एक धर्म या संस्कृति पर। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि भारत बहुसांस्कृतिक देश है, जहां एक ही सोच को राष्ट्रवाद का आधार नहीं बनाया जा सकता। मौलाना मदनी ने जोर दिया कि देश की तरक्की और एकता के लिए जरूरी है कि संवाद, आपसी सम्मान और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत किया जाए। इसके साथ ही संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है।