Public Anger Against Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सेना की कार्रवाई के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में लोगों ने आरोप लगाया कि सेना ने उनके घरों और मस्जिदों पर भारी हथियारों से गोलीबारी की, जिससे कई मकान और धार्मिक स्थल क्षतिग्रस्त हो गए। इसी बीच बलूचिस्तान के केच जिले में चार नागरिकों की हत्या ने हालात को और भड़का दिया है। दोनों इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर सेना आम लोगों पर अत्याचार कर रही है।
सेना पर समझौता तोड़ने का आरोप
बाजौर के कोसर इलाके में बुधवार रात हुई गोलाबारी के बाद लोगों ने बाजौर-पेशावर हाईवे जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 14 अगस्त को हुए शांति समझौते में यह तय हुआ था कि किसी भी सैन्य अभियान के दौरान आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन सेना ने इस वादे का उल्लंघन किया। बाजौर अमन जरगा के प्रमुख साहिबजादा हारून रशीद ने चेतावनी दी कि अगर यह रवैया जारी रहा तो लोगों का भरोसा सेना से पूरी तरह उठ जाएगा। स्थानीय नेताओं ने भी कहा कि लगातार हो रही हिंसा से व्यापार ठप है, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और लोग दहशत में हैं।
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बलूचिस्तान में बढ़ी नाराजगी
बलूचिस्तान के केच जिले में 28 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच चार लोगों की हत्या ने तनाव को और गहरा दिया है। बलोच यकजहती कमेटी ने इन घटनाओं को “राज्य प्रायोजित हत्याएं” बताया है। मारे गए लोगों में एक पूर्व सैनिक, एक स्कूल कर्मचारी, एक मजदूर और एक छात्र शामिल हैं। कमेटी ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों की शह पर काम करने वाले समूह बलोच युवाओं को अगवा कर उनकी हत्या कर रहे हैं और लाशें फेंक दी जा रही हैं। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि वे बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हो रही इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके।