जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से निकलकर पाकिस्तान पहुंचे और बाद में आतंकी संगठन अल बद्र का बड़ा चेहरा बने हमजा बुरहान की मौत ने एक बार फिर पाकिस्तान और आतंकवाद के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की सुरक्षा में रह रहा था।
पुलवामा से पाकिस्तान तक का सफर
हमजा बुरहान का संबंध जम्मू-कश्मीर के Pulwama से बताया जा रहा है। बाद में वह पाकिस्तान चला गया और वहां प्रतिबंधित आतंकी संगठन Al Badr से जुड़ गया। धीरे-धीरे वह संगठन का कमांडर बन गया और भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगा।
ISI ने ‘प्रिंसिपल’ बनाकर छिपाया
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने उसे POK में एक स्कूल प्रिंसिपल के रूप में छिपाकर रखा था। बाहर से वह एक सामान्य शिक्षक जैसा दिखाई देता था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क संचालित करता था। उसकी सुरक्षा के लिए AK-47 से लैस गार्ड भी तैनात थे।
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पुलवामा हमले से जुड़ा नाम
हमजा बुरहान का नाम 2019 के Pulwama attack से भी जोड़ा गया। इस आतंकी हमले में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा उस पर विस्फोटक सप्लाई, ग्रेनेड हमलों और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने के आरोप भी थे।
कैसे हुई मौत?
इतनी सुरक्षा के बावजूद POK में अज्ञात हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी। फिलहाल हमलावरों की पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई है। पाकिस्तान की ओर से भी इस घटना पर आधिकारिक जानकारी सीमित ही सामने आई है।
पुलवामा हमला क्यों था अहम?
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में CRPF काफिले पर हुए आत्मघाती हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। इसके जवाब में भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। यह हमला 1989 के बाद सुरक्षा बलों पर सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है।