Punjab SIR Controversy : पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। पंजाब विधानसभा में इस प्रक्रिया के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें अब तक SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच कराने और वोट काटने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इस प्रस्ताव के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।
भगवंत मान ने SIR रद्द करने की मांग की
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में चर्चा के दौरान SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। मान ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ लोगों के वोट हटाए जाते हैं, जबकि अपने समर्थकों के वोट जुड़वाने की कोशिश की जाती है। ये आरोप मुख्यमंत्री ने सदन में लगाए हैं।
13 करोड़ वोट कटने का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि SIR के जरिए देशभर में 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट काट दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया। मान ने कहा कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी योग्य मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े। हालांकि, 13 करोड़ से अधिक वोट कटने का आंकड़ा मुख्यमंत्री के दावे के रूप में सामने आया है। विधानसभा में पारित प्रस्ताव में भी मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल
पंजाब सरकार के प्रस्ताव में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग भी शामिल है। प्रस्ताव के मुताबिक, SIR के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही उन लोगों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है, जिन पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है। वहीं, उनके बयान में लगाए गए आरोपों और प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं अहम होंगी।
हरपाल चीमा ने सदन में रखा प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पेश किया। इस प्रस्ताव में अब तक की प्रक्रिया की जांच कराने, मतदाता सूची में हुए बदलावों की समीक्षा करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। सरकार का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच होनी चाहिए। प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा भी उठाया गया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष और स्वतंत्र बनी रहनी चाहिए। इस कदम के बाद पंजाब में SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
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मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही
SIR पर चर्चा के बाद पंजाब विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। सदन में पारित प्रस्ताव के जरिए राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया की जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और चुनाव आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग उठाई है। अब इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक और संस्थागत कार्रवाई पर नजर रहेगी। पंजाब सरकार ने SIR को लेकर अपना विरोध स्पष्ट कर दिया है। वहीं, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और मुख्यमंत्री के दावों को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।