दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन गई। पुतिन ने बातचीत की शुरुआत भारत आने के आमंत्रण के लिए मोदी का धन्यवाद करते हुए की। उन्होंने कहा कि वे यूक्रेन संकट से जुड़े कई महत्वपूर्ण विवरण साझा करना चाहते हैं और अमेरिका सहित कुछ देशों के साथ संभावित शांति समझौते पर चर्चा चल रही है। पुतिन ने यह भी स्वीकार किया कि पीएम मोदी जिस गंभीरता और व्यक्तिगत ध्यान के साथ इस मुद्दे को देखते हैं, वह दुनिया के लिए बेहद मूल्यवान है। रूस ने इसे भारत के भरोसेमंद नेतृत्व का मजबूत संकेत बताया।
भारत तटस्थ नहीं, हमेशा शांति के साथ
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से विश्व कई संकटों से गुजर रहा है कोविड, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट। उन्होंने विश्वास जताया कि बहुत जल्द दुनिया इन चिंताओं से मुक्त होगी। महत्वपूर्ण बात यह रही कि मोदी ने साफ कहा कि भारत तटस्थ नहीं है भारत का पक्ष हमेशा शांति का है। हर वार्ता, हर मंच और हर वैश्विक बातचीत में भारत ने एक ही संदेश दिया है कि युद्ध नहीं, समाधान चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति प्रयासों के साथ भारत कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और यह रुख आगे भी जारी रहेगा।
यूक्रेन संकट पर खुली दिल से बातचीत
मोदी ने स्वीकार किया कि यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच लगातार संवाद होता रहा है। उन्होंने कहा कि पुतिन हमेशा मित्र की तरह हर स्थिति से अवगत कराते रहे। पीएम मोदी ने कहा कि देशों के बीच विश्वास सबसे बड़ी ताकत होती है और रूस द्वारा दिया गया भरोसा भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण है। इस मुलाकात में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, जो इस वार्ता की गंभीरता को दर्शाता है।
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25 सालों की साझेदारी का नया अध्याय
पुतिन और मोदी की इस बैठक ने 25 साल पुराने भारत–रूस रणनीतिक रिश्ते को फिर मजबूत संदेश दिया। मोदी ने याद दिलाया कि 2001 में पुतिन पहली बार भारत आए थे और तभी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा कि बीते 25 वर्षों में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर मिलकर कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इस मुलाकात को भी उसी सिलसिले का अगला बड़ा अध्याय माना जा रहा है। अब उम्मीद है कि वार्ता के बाद व्यापार व ऊर्जा क्षेत्रों में कुछ अहम घोषणाएं सामने आएंगी और शांति प्रयासों को नई गति मिलेगी।