
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में 2024 लोकसभा चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा और महाराष्ट्र के राजुरा निर्वाचन क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों वोटों में हेराफेरी की गई है लेकिन अब चुनाव आयोग (ECI) ने राहुल गांधी के इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि "सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन और निराधार हैं। किसी भी वोट को ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता और न ही आम जनता ऐसा कर सकती है।"
आयोग का स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग के अनुसार वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती है। किसी भी नाम को डिलीट करने से पहले प्रभावित व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है और उसका पक्ष सुना जाता है। ऑनलाइन वोट डिलीट करने की संभावना बिल्कुल नहीं है। आयोग ने यह भी बताया कि 2023 में कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र में कुछ शरारती तत्वों ने वोट डिलीट करने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन वह नाकाम रही। इस मामले में खुद चुनाव आयोग ने FIR दर्ज कराई थी।
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राहुल गांधी के आरोप
राहुल गांधी का कहना था कि कर्नाटक के आलंद क्षेत्र में करीब 6,018 वोट डिलीट करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि यह सब बाहरी ताकतों द्वारा सिस्टम हैक करके किया गया। राहुल के अनुसार, वोट डिलीट करने में कर्नाटक के बाहर के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ। इसी तरह महाराष्ट्र के राजुरा क्षेत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यहां 6,850 वोटों को अवैध तरीके से जोड़ा गया। राहुल का आरोप था कि यह प्रक्रिया सिर्फ कर्नाटक या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं, बल्कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी चल रही है।
आयोग का पलटवार
राहुल गांधी के इस दावे को आयोग ने पूरी तरह खारिज किया। आयोग ने साफ किया कि न तो वोट चोरी हुई है और न ही किसी तकनीकी सिस्टम से छेड़छाड़ की गई है। EC के मुताबिक, 2023 में अलंद सीट से जुड़ा जो मामला सामने आया था, उसमें किसी भी वोटर का नाम अवैध तरीके से नहीं हटाया गया। उलटे आयोग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया था।
सियासी टकराव तेज़
राहुल गांधी का यह बयान चुनावी माहौल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता था, लेकिन आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया देकर साफ कर दिया कि "वोट चोरी" का कोई सवाल ही नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी तरह का आरोप लगाते समय तथ्यों का सहारा लेना चाहिए, अन्यथा इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचता है। स्पष्ट है कि राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच यह विवाद आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और गरमा सकता है।