लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी ताकत डेटा है। उनके मुताबिक भारत के लोगों के पास सबसे ज्यादा डेटा है और यही हमारी असली पूंजी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों की नजर भारतीय डेटा पर है। अगर हमने इसकी सुरक्षा नहीं की तो हमारे टैलेंट और सोच पर बाहरी ताकतें हावी हो सकती हैं। राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि बजट में डेटा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नजर नहीं आता।
टैरिफ और टेक्सटाइल पर सवाल
राहुल गांधी ने व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अगर टेक्सटाइल निर्यात करता है तो उसे जीरो टैरिफ मिलता है, लेकिन भारत की इंडस्ट्री को नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने टैरिफ बढ़ा दिए और इसका असर भारतीय कारोबार पर पड़ा। उनके मुताबिक सवाल यह है कि अगर कोई देश यह तय करे कि भारत कहां से तेल खरीदे, तो यह हमारी आर्थिक आजादी के खिलाफ है।
एनर्जी और फाइनेंस का ‘हथियारीकरण’
राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया में अब ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर अमेरिका कहता है कि आप यहां से तेल नहीं खरीद सकते, तो इसका मतलब है कि एनर्जी सेक्टर का दबाव बनाया जा रहा है। इसी तरह टैरिफ बढ़ाना फाइनेंस सिस्टम पर पकड़ बनाने जैसा है। उन्होंने कहा कि एक सुपर पावर का दौर खत्म हो चुका है और अब नए तरह की वैश्विक राजनीति सामने आ रही है।
एआई और नई चुनौतियां
राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि यह आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है। उनके मुताबिक डेटा एआई के लिए पेट्रोल जैसा है। अगर डेटा सुरक्षित नहीं रहा तो देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों की प्राइवेसी दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि बजट में इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया है।
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डील में क्या होना चाहिए था?
उन्होंने कहा कि अगर किसी विदेशी नेता से बातचीत होती, तो सबसे पहले डेटा सुरक्षा की बात होनी चाहिए थी। दूसरी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा और तीसरी किसानों के हितों की रक्षा होनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने कहा कि भारत किसी के बराबर खड़ा देश है, किसी का अधीन नहीं। इसलिए हर समझौते में देश के हित सबसे ऊपर होने चाहिए।
मार्शल आर्ट का उदाहरण
अपने भाषण की शुरुआत राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट के उदाहरण से की। उन्होंने कहा कि पहले पकड़ बनाई जाती है और फिर गला दबाया जाता है। उनका इशारा था कि वैश्विक ताकतें धीरे-धीरे नियंत्रण करती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल रही है और भारत को सतर्क रहना होगा। उनके मुताबिक डेटा की सुरक्षा आने वाले समय में सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनने वाला है।