आने वाले बजट में सरकार एक बार फिर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने की तैयारी में है। इसका मकसद साफ है—अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना और मांग को मजबूत करना। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले वित्तीय वर्ष में रेलवे को करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जो मौजूदा साल के 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। रेलवे प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ने के कारण इस सेक्टर को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। वहीं हाईवे सेक्टर में बजट बढ़ोतरी सीमित रह सकती है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में इस पर पहले ही भारी निवेश हो चुका है।
कैपेक्स पर सरकार का फोकस बरकरार
सरकार लगातार पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स को बढ़ाने पर जोर दे रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में कैपेक्स में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया गया था। अप्रैल से अक्टूबर के बीच सरकार का कैपेक्स खर्च 13 प्रतिशत बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह संकेत देता है कि सरकार आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए खर्च करने से पीछे नहीं हट रही। खास बात यह है कि निजी निवेश अभी सुस्त है, ऐसे में सरकार खुद खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है।
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रेलवे को क्यों मिल सकती है बढ़त
रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले बजट में उन्हें ज्यादा आवंटन मिलेगा। इसकी वजह यह है कि नई रेलवे लाइनों, मल्टी-ट्रैकिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। रेलवे इस वित्त वर्ष में अब तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, जो तय बजट का बड़ा हिस्सा है। खर्च का बड़ा भाग नई ट्रेनें, वैगन, लोकोमोटिव और नेटवर्क विस्तार पर हो रहा है। रेलवे को प्राथमिकता देने का एक बड़ा कारण यह भी है कि यह माल और यात्रियों के लिए सबसे किफायती और व्यापक साधन माना जाता है।
हाईवे सेक्टर में क्यों रह सकता है ठहराव
हाईवे सेक्टर की रफ्तार फिलहाल कुछ धीमी नजर आ रही है। नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने की गति कम हुई है और तय लक्ष्यों की तुलना में मंजूर किलोमीटर भी कम हैं। अधिकारियों का मानना है कि प्रोजेक्ट अप्रूवल में कमी से खर्च पर असर पड़ेगा, इसलिए अगले साल इस सेक्टर के बजट को मौजूदा स्तर पर ही रखा जा सकता है। सरकार का आकलन है कि रेलवे में निवेश से रोजगार, आय और व्यापार को ज्यादा फायदा होगा। इसी वजह से इस बार बजट का पलड़ा रेलवे की ओर झुकता दिख रहा है।